** मत्स्यपालन विभाग के केन्द्रीय सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने मुनस्यारी शीतजल मत्स्यपालन क्लस्टर का दौरा किया, ट्राउट किसानों से संवाद एवं विकास कार्यों की समीक्षा की
Naitik Chakravarti Times
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** डॉ. अभिलक्ष लिखी ने मुनस्यारी शीतजल क्लस्टर में ट्राउट पालन करने वाले किसानों से मुलाकात कर, क्लस्टर के बुनियादी ढाँचे, तकनीकी सहायता और विपणन योजनाओं की प्रगति का मूल्यांकन किया।
** मत्स्यपालन विभाग के केन्द्रीय सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने हाल ही में उत्तराखंड के मुनस्यारी में स्थित शीतजल मत्स्यपालन क्लस्टर का आधिकारिक दौरा किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ट्राउट मछली की खेती में संलग्न स्थानीय किसानों से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करना और क्लस्टर के समग्र विकास कार्यों की स्थिति का आकलन करना था। क्लस्टर, जो पिछले पाँच वर्षों में राज्य सरकार की विशेष सहायता से स्थापित हुआ है, में लगभग दो सौ एकड़ जलस्रोत और आधुनिक हाइड्रोपोनिक प्रणाली के साथ 1500 से अधिक ट्राउट मछलियों की उत्पादन क्षमता है। दौरे के दौरान डॉ. लिखी ने जल गुणवत्ता नियंत्रण, बीमारियों की रोकथाम और उच्च उत्पादन तकनीकों पर केंद्रित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता की समीक्षा की।
क्लस्टर के प्रमुख किसानों ने विभाग को अपनी चुनौतियों से अवगत कराया, जिसमें जल प्रवाह का स्थिरता, बाजार तक पहुँच और उचित मूल्य निर्धारण शामिल हैं। डॉ. लिखी ने इन मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए, जल प्रबंधन में नवीनतम सेंसर तकनीक और डिजिटल बाजार मंच की त्वरित कार्यान्वयन का वचन दिया। उन्होंने कहा कि आगामी वित्तीय वर्ष में क्लस्टर के बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने के लिए अतिरिक्त पूँजी आवंटित की जाएगी, जिसमें ठंडा जल भंडारण टैंक, बायोफिल्टर और पुनरावृत्ति प्रणाली शामिल हैं। साथ ही, विभाग ने ट्राउट की निर्यात क्षमता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रमाणन प्रक्रिया को तेज करने की योजना बनाई है।
डॉ. लिखी ने इस अवसर पर स्थानीय प्रशासन और किसान संघों के सहयोग को सराहा और कहा कि शीतजल मत्स्यपालन न केवल ग्रामीण आय में वृद्धि करेगा, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और जल संसाधन संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। उन्होंने क्लस्टर के सतत विकास के लिए निरंतर निगरानी और समय-समय पर तकनीकी अद्यतन सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।