भारत में खेलों का विकास: नीति, उपलब्धियां और चुनौतियां
Naitik Chakravarti Times
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पिछले दो दशकों में भारत ने खेल बुनियादी ढांचा, कोचिंग और एथलीट समर्थन में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर उल्लेखनीय सफलता मिली है। यह लेख सरकारी पहल, अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां, महिला सहभागिता और भविष्य की चुनौतियों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
भारत में खेलों का विकास पिछले दो दशकों में तेज़ी से आगे बढ़ा है, जिसमें सरकार, निजी क्षेत्र और खेल संस्थाओं का सहयोग प्रमुख भूमिका निभा रहा है। राष्ट्रीय खेल नीति 2012 के बाद कई सुधार लागू किए गए, जिससे खेल बुनियादी ढांचा, कोचिंग और एथलीट समर्थन में सुधार हुआ। इस नीति के अंतर्गत 2023 में कुल 1.8 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक है। परिणामस्वरूप भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं, विशेषकर ओलंपिक और एशिया खेलों में। यह लेख खेल विकास के प्रमुख पहलुओं, उपलब्धियों और भविष्य की चुनौतियों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। सरकार ने 2018 में शुरू किए गए खेल मिशन 'खेलो इंडिया' को 2023 में 2.5 अरब रुपये के अतिरिक्त फंड से सुदृढ़ किया, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 5,000 से अधिक खेल अकादमी स्थापित हुईं। इस पहल के तहत 1,200 स्कूलों को उच्च गुणवत्ता वाली खेल सुविधाएं प्रदान की गईं, और 250 कोचिंग सेंटरों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अपग्रेड किया गया। पेरिस 2024 ओलंपिक में भारत ने कुल सात पदक जीते, जिसमें दो स्वर्ण, दो रजत और तीन कांस्य शामिल हैं। स्वर्ण पदक वॉलीबॉल और शूटर में प्राप्त हुए, जबकि रजत पदक तीरंदाजी और बैडमिंटन में मिले। इस सफलता ने राष्ट्रीय खेल परिषद को नई रणनीतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया, जिसमें एथलीटों की वैज्ञानिक प्रशिक्षण और पोषण पर विशेष ध्यान दिया गया। पिछले पाँच वर्षों में महिला एथलीटों की भागीदारी में 35 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। 2023 में महिला खेलों के लिए विशेष रूप से 300 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया, जिससे महिला खेल अकादमी, स्कॉलरशिप और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए समर्थन बढ़ा। इस नीति के परिणामस्वरूप 2024 एशिया खेलों में भारतीय महिला टीम ने 12 पदक जीते, जो पिछले दो दौरों की तुलना में दो गुना अधिक है। भले ही उपलब्धियां उल्लेखनीय हों, खेल बुनियादी ढांचे में असमानता और कोचिंग की गुणवत्ता में अंतर अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। कई छोटे शहरों में आधुनिक सुविधाओं की कमी के कारण प्रतिभाशाली एथलीट अक्सर बड़े शहरों की ओर प्रवास करते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कमजोर होती है। इसके अलावा निजी क्षेत्र के निवेश में निरंतरता की कमी और एथलीटों के करियर पश्चात समर्थन की अपर्याप्त व्यवस्था भी विकास को बाधित करती है। विश्लेषकों का मानना है कि 2030 तक भारत को खेलों में विश्व स्तर पर शीर्ष पाँच देशों में शामिल करने के लिए एकीकृत राष्ट्रीय खेल मंच की आवश्यकता है। इस मंच के तहत एकीकृत डेटा बेस, एथलीटों के लिए दीर्घकालिक बीमा, और निजी-सरकारी साझेदारी मॉडल को लागू किया जाना चाहिए। यदि इन उपायों को समय पर लागू किया गया, तो भारत अगले दो दशकों में ओलंपिक में 20 से अधिक पदक जीतने की संभावना रखता है, जिससे राष्ट्रीय गर्व और आर्थिक लाभ दोनों में वृद्धि होगी।