भारत और कनाडा ने पहली बार रक्षा संवाद आयोजित किया, जिससे दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और रणनीतिक संवाद को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
भारत और कनाडा के रक्षा मंत्रियों ने इस सप्ताह एक ऐतिहासिक रक्षा संवाद का उद्घाटन किया, जो दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करने का एक नया अध्याय है। इस संवाद का आयोजन भारतीय रक्षा मंत्रालय और कनाडा के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से किया गया और इसमें दोनों पक्षों के वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों, रणनीतिकारों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। संवाद के दौरान रक्षा नीति, समुद्री सुरक्षा, साइबर रक्षा, आतंकवाद विरोधी कार्यवाही, और संयुक्त सैन्य अभ्यास जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
इस पहल का आधार 2015 में दोनों देशों के बीच हुए रक्षा सहयोग समझौते पर है, जिसके तहत रक्षा उपकरणों का आयात-निर्यात, संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम, और तकनीकी विनिमय को बढ़ावा मिला है। संवाद के दौरान दोनों देशों ने संयुक्त अभ्यासों के विस्तार, विशेषकर दक्षिण प्रशांत और अटलांटिक महासागर में संयुक्त नौसैनिक ड्रिल्स पर सहमति जताई। इसके अलावा, दोनों पक्षों ने साइबर सुरक्षा और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों जैसे ड्रोन, सैटेलाइट संचार, और एआई आधारित युद्ध प्रणाली पर गहन संवाद किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह संवाद भारत के लिए अपनी रक्षा क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर वैविध्यपूर्ण बनाने का एक महत्वपूर्ण कदम है, जबकि कनाडा के लिए यह भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का अवसर है। दोनों देशों के बीच बढ़ती हुई आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों के साथ, रक्षा संवाद से अपेक्षा है कि यह द्विपक्षीय सहयोग को नए आयाम देगा और अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोनों राष्ट्रों की भूमिका को सुदृढ़ करेगा।