भारतीय वायु सेना 21 अक्टूबर, 2026 को मानवरहित और स्वायत्त प्रणालियों के विकास संबंधी रोडमैप पर रक्षा उद्योग जगत के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित करेगी
Naitik Chakravarti Times
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भारतीय वायु सेना ने मानवरहित व स्वायत्त विमानन प्रणालियों के विकास के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है, जिसे 21 अक्टूबर को रक्षा उद्योग के प्रमुख खिलाड़ियों के साथ संवाद कार्यक्रम में पेश किया जाएगा।
भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने मानवरहित वायुयान (ड्रोन) तथा स्वायत्त प्रणालियों के क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को तेज़ी से बढ़ाने का लक्ष्य रखते हुए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया है। इस योजना के तहत, आईएएफ अगले पाँच वर्षों में 50 से अधिक नई स्वायत्त प्रणालियों का विकास, परीक्षण और तैनाती करने की योजना बना रही है, जिनमें जमीनी समर्थन, निगरानी, टोही और लॉजिस्टिक्स के लिए उन्नत UAVs शामिल हैं।
इस रोडमैप को औपचारिक रूप से पेश करने के लिए 21 अक्टूबर को रक्षा उद्योग जगत के साथ एक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, आईएएफ के प्रमुख अधिकारी, और प्रमुख रक्षा निर्माता एवं अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य नीति-निर्माण, अनुसंधान एवं विकास (R&D), तथा उत्पादन क्षमताओं के बीच तालमेल बढ़ाना है। रक्षा उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि स्वायत्त प्रणालियाँ न केवल परिचालन दक्षता बढ़ाएँगी, बल्कि मानव संसाधन पर भार भी कम करेंगी।
रक्षा मंत्रालय ने इस पहल को राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी स्वावलंबन के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। 2024 के रक्षा नीति दस्तावेज़ में पहले ही मानवरहित वायुयान के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया गया था, और अब आईएएफ ने इस दिशा में ठोस कार्ययोजना पेश की है। कार्यक्रम के दौरान, दोनों पक्षों द्वारा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, संयुक्त परीक्षण प्रोटोकॉल, और भविष्य की खरीद योजनाओं पर चर्चा की जाएगी। इस संवाद से भारतीय रक्षा उद्योग को नई स्वायत्त तकनीकों के विकास में तेज़ी और प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी, जिससे देश की रक्षा क्षमताओं को और सुदृढ़ बनाया जा सकेगा।