एनआरए, आईसीएआर‑एनबीएसएस और एलयूपी तथा डीओएलआर ने विज्ञान आधारित वाटरशेड प्रबंधन को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय स्तर के परामर्श का आयोजन किया
Naitik Chakravarti Times
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राष्ट्रीय शोध एवं कृषि विज्ञान संगठनों ने मिलकर जलक्षेत्र प्रबंधन के क्षेत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने हेतु एक राष्ट्रीय परामर्श कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
वाटरशेड प्रबंधन के क्षेत्र में वैज्ञानिक साक्ष्य को प्राथमिकता देते हुए एनआरए (राष्ट्रीय शोध परिषद), आईसीएआर‑एनबीएसएस (कृषि अनुसंधान परिषद – राष्ट्रीय भूजल एवं सतही जल ब्यूरो), एलयूपी (सतत जल प्रबंधन परियोजना) और डीओएलआर (भूमि एवं क्षेत्रीय विकास विभाग) ने एक राष्ट्रीय स्तर का परामर्श कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जलक्षेत्रों के समग्र प्रबंधन के लिए नवीनतम अनुसंधान निष्कर्षों और प्रौद्योगिकियों को नीति एवं अभ्यास में समाहित करना था।
परामर्श में जल विज्ञान, भूविज्ञान, कृषि विज्ञान, पर्यावरण नीति और स्थानीय समुदायों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रमुख विषयों में जल संसाधन के सतत उपयोग के लिए मॉडलिंग टूल्स, जलग्रहण क्षेत्र के भीतर जल प्रवाह और भंडारण के प्रबंधन, तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अनुकूलन रणनीतियाँ शामिल थीं। कार्यक्रम के दौरान, प्रतिभागियों ने जलक्षेत्रों की सूक्ष्म स्तर पर निगरानी के लिए सेंसर नेटवर्क, डेटा एकीकरण प्लेटफ़ॉर्म और रिमोट सेंसिंग तकनीकों के उपयोग पर चर्चा की।
इस परामर्श से प्राप्त सिफ़ारिशों के आधार पर, सरकार को जलक्षेत्र प्रबंधन के लिए एक राष्ट्रीय ढाँचा तैयार करने का निर्देश दिया गया है। इसमें वैज्ञानिक डेटा पर आधारित निर्णय लेने के लिए एक केंद्रीय पोर्टल, क्षेत्रीय जलक्षेत्रों के लिए अनुकूलित प्रबंधन योजनाएँ और सामुदायिक भागीदारी के लिए सशक्तिकरण कार्यक्रम शामिल होंगे। इस पहल से जलक्षेत्रों की उत्पादकता, जल गुणवत्ता और पारिस्थितिक संतुलन में सुधार की उम्मीद है, जो कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग दोनों के लिए स्थिर जल उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।