दिल्ली में विजय दशमी समारोह में प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ
Naitik Chakravarti Times
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प्रधानमंत्री ने दिल्ली में आयोजित विजय दशमी समारोह में संबोधन देते हुए देशभक्ति, ऐतिहासिक उपलब्धि और राष्ट्रीय एकता पर बल दिया।
विजय दशमी के पावन अवसर पर, भारत के प्रधानमंत्री ने दिल्ली की राजधानी में आयोजित भव्य समारोह में संबोधन दिया। यह कार्यक्रम 1971 की स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पाकिस्तान के विरुद्ध भारत की निर्णायक जीत की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में देशभक्ति की भावना, ऐतिहासिक उपलब्धि और राष्ट्रीय एकता के महत्व को रेखांकित किया, साथ ही वर्तमान में देश के सामने आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए नागरिकों को प्रेरित किया।
संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने 1971 की युद्ध की याद दिलाई, जहाँ भारतीय सशस्त्र बलों और नागरिकों की बहादुरी ने एक बार फिर भारत को स्वतंत्रता और संप्रभुता के पथ पर अग्रसर किया। उन्होंने युद्ध के दौरान हुई बलिदानों की याद दिलाते हुए कहा कि "विजय दशमी हमें यह सिखाती है कि एकता और समर्पण से हम किसी भी चुनौती को पार कर सकते हैं।" इसके अलावा, उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और सामाजिक समावेशन के क्षेत्र में सरकार की चल रही पहलों पर प्रकाश डाला, और नागरिकों से आग्रह किया कि वे इन प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाएँ।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में सभी भारतीयों को शांति, समृद्धि और प्रगति के लिए एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि "हमारा देश अब भी एक विविधता से परिपूर्ण समाज है, और यह विविधता हमें और मजबूत बनाती है।" इस भाषण ने न केवल विजय दशमी की ऐतिहासिक यादों को ताज़ा किया, बल्कि भविष्य के लिए एक प्रेरणादायक संदेश भी दिया, जिसमें राष्ट्रीय एकता और समृद्धि के प्रति समर्पण को प्रमुखता से उभारा गया।