** एशियाई खेल 2026 के प्रतिभागियों के साथ बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ
Naitik Chakravarti Times
••0 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें
** एशियाई खेल 2026 में भारतीय खिलाड़ियों के साथ हुई बातचीत में प्रधानमंत्री ने खेल, राष्ट्रीय एकता और युवा सशक्तिकरण पर अपना विचार प्रस्तुत किया, जिसका पूर्ण पाठ सरकार ने सार्वजनिक किया।
**
एशियाई खेल 2026 के दौरान भारत के खेल प्रतिनिधिमंडल के साथ आयोजित संवाद सत्र में प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का मूल पाठ जारी किया। इस आधिकारिक दस्तावेज़ में प्रधानमंत्री ने खेल को राष्ट्रीय विकास का प्रमुख साधन मानते हुए, “खेल केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, शारीरिक स्वास्थ्य और नैतिक मूल्यों का संचार है” कहा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष एशियाई खेलों में भारत ने विविध खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है और यह उपलब्धि खिलाड़ियों, कोचों और समर्थन प्रणाली के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। साथ ही, उन्होंने खेल के माध्यम से युवा वर्ग में अनुशासन, टीमवर्क और आत्मविश्वास को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया, तथा सरकार की नई पहल “खेल-युवा 2030” के तहत बुनियादी ढाँचे, प्रशिक्षण सुविधाओं और स्कॉलरशिप योजनाओं को सुदृढ़ करने का संकल्प दोहराया।
संबोधन में भारत के अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठा बढ़ाने के लक्ष्य को भी रेखांकित किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा, “एशियाई खेलों में हमारा उद्देश्य केवल पदक जीतना नहीं, बल्कि खेल के माध्यम से मित्रता और समझ को गहरा करना है। हम सभी एशिया के देशों के साथ सहयोग को बढ़ावा देंगे और खेल के माध्यम से शांति एवं समृद्धि की दिशा में कदम बढ़ाएंगे।” उन्होंने भारतीय खेल संस्थानों को निरंतर समर्थन देने, प्रशिक्षण के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाने और ग्रामीण तथा पिछड़े क्षेत्रों के प्रतिभाओं को पहचानने की नीति पर ज़ोर दिया। इस प्रकार, प्रधानमंत्री का यह संबोधन खेल के राष्ट्रीय महत्व को पुनः स्थापित करते हुए, भविष्य की पीढ़ी को प्रेरित करने का उद्देश्य रखता है।