विदेश में पढ़ रहे दलित छात्र दमनकारी जाति पदानुक्रमों से बच निकलने की आशा रखते हैं, परन्तु उन्हें पता चलता है कि प्रमुख‑जाति प्रवासी ने अपनी पक्षपात को सीमाओं पार कक्षाओं और सामाजिक माहौल में निर्यात कर दिया है, रिपोर्ट करता है राधेश्याम जाधव

Naitik Chakravarti Times
अनुभवी पत्रकार और लेखक