** भारत की राष्ट्रपति कुरुक्षेत्र में स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान शताब्दी समारोह में शामिल हुईं
Naitik Chakravarti Times
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** राष्ट्रपति ने स्वामी श्रद्धानंद के शताब्दी स्मरण समारोह में उपस्थिति दर्ज कर देश के सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय एकता के प्रति उनके योगदान को सम्मानित किया।
** कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक मैदान में आयोजित स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान शताब्दी समारोह में भारत की राष्ट्रपति ने भाग लेकर इस महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम को गौरव प्रदान किया। राष्ट्रपति ने सभा में उपस्थित प्रमुख नेताओं, विद्वानों और आम जनता के साथ मिलकर स्वामी श्रद्धानंद के सामाजिक सुधार, शिक्षा और स्वतंत्रता संग्राम में किए गए अद्वितीय योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि स्वामी जी का विचारधारा, जो राष्ट्रीय एकता, धार्मिक सौहार्द और सामाजिक समानता पर आधारित थी, आज के भारत के विकास के लिए प्रेरणा स्रोत है।
समारोह में स्वामी श्रद्धानंद के शहीदी के शताब्दी वर्ष को चिह्नित करने हेतु विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, व्याख्यान और स्मारक स्थापित करने की प्रक्रिया को भी उजागर किया गया। मुख्य मंच पर राष्ट्रपति ने एकत्रित भीड़ को संबोधित करते हुए, स्वामी जी की बलिदानी भावना को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि उनके आदर्शों को अपनाकर ही भारत सामाजिक प्रगति और राष्ट्रीय अखंडता की दिशा में आगे बढ़ सकता है। साथ ही, राष्ट्रपति ने शिक्षा और सामाजिक सुधार के क्षेत्रों में चल रहे सरकारी योजनाओं के समर्थन की पुष्टि की, जिससे स्वामी जी के सपनों को वास्तविक रूप में साकार किया जा सके।
समापन समारोह में स्वामी श्रद्धानंद की प्रतिमा का अनावरण किया गया, जिसे राष्ट्रपति ने प्रथम बार स्पर्श किया। इस अवसर पर कई सामाजिक संगठनों ने स्वामी जी के शहादत के मूल्यों को पुनः जागरूक करने के लिए विभिन्न पहलें घोषित कीं। राष्ट्रपति की उपस्थिति ने इस शताब्दी स्मरण को राष्ट्रीय स्तर पर महत्व प्रदान किया और यह संकेत दिया कि भारत अपने इतिहास के महान व्यक्तियों को सम्मानित करते हुए भविष्य की दिशा में दृढ़ संकल्प के साथ अग्रसर है।