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जनपद फतेहपुर में शिक्षा का गिरता स्तर: पैसा दो - डिग्री लो
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जनपद फतेहपुर में शिक्षा का गिरता स्तर: पैसा दो - डिग्री लो

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•12 अक्टूबर 2026 को 09:25 am बजे•3 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें

फतेहपुर। कभी शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले विद्यालय और महाविद्यालय आज दुकान बनते जा रहे हैं। जनपद फतेहपुर में शिक्षा का स्तर इस कदर गिर चुका है कि अब यहाँ पढ़ाई और परीक्षा की जरूरत ही नहीं रह गई है, बस जेब में पैसा होना चाहिए और हाथ में डिग्री।

ना पढ़ाई, ना परीक्षा, सीधे डिग्री

खागा, असोथर, हथगाम, विजयीपुर, बहुआ - जिले के लगभग हर ब्लॉक में ऐसे दर्जनों प्राइवेट डिग्री कॉलेज संचालित हो रहे हैं, जहाँ साल भर एक भी क्लास नहीं चलती। छात्र ने कभी कॉलेज का गेट तक नहीं देखा, प्रोफेसर को नहीं पहचानता, लेकिन परीक्षा फॉर्म से लेकर प्रैक्टिकल तक सब मैनेज हो जाता है। नियत तिथि पर छात्र को सिर्फ परीक्षा केंद्र पर जाकर बैठना है और 2-3 साल बाद उसे ग्रेजुएट की डिग्री मिल जाती है।

कैसे चल रहा है खेल?

खेल बहुत साफ है। एडमिशन के समय 8 से 12 हजार रुपये की फीस लो, और छात्र को आश्वासन दो - "तुम्हें आने की जरूरत नहीं है, हम देख लेंगे।" न अटेंडेंस की टेंशन, न असाइनमेंट का झंझट। कॉलेज प्रबंधन विश्वविद्यालय स्तर पर सब सेटिंग कर लेता है। प्रैक्टिकल के नंबर तो ऐसे ही चढ़ जाते हैं।

कौन है जिम्मेदार?

इसके जिम्मेदार सिर्फ कॉलेज ही नहीं, हमारा सिस्टम भी है।
1. विश्वविद्यालय की लचर निगरानी: कभी भी इन कॉलेजों का औचक निरीक्षण नहीं होता।
2. छात्रों की मजबूरी: कई छात्र रोजगार या पलायन के कारण बाहर रहते हैं, उन्हें ऐसी ही डिग्री चाहिए।
3. अभिभावकों की चुप्पी: फीस देकर डिग्री मिल रही है तो शिकायत कौन करे।

भविष्य पर सवाल

सबसे बड़ा नुकसान उन गरीब और मेधावी छात्रों का हो रहा है जो दिन-रात मेहनत करके पढ़ते हैं। जब एक न पढ़ने वाला और एक मेहनत करने वाला छात्र एक ही लाइन में खड़ा होकर एक ही डिग्री पाएगा, तो शिक्षा का मूल्य क्या रह जाएगा? यही बिना ज्ञान वाली डिग्री लेकर युवा प्रतियोगी परीक्षाओं में फेल हो रहे हैं और बेरोजगारी का रोना रो रहे हैं।

पैसा दो-डिग्री लो की यह परंपरा अगर नहीं रुकी तो आने वाले समय में फतेहपुर में डिग्रीधारी तो बहुत होंगे, लेकिन शिक्षित कोई नहीं होगा।

जिलाधिकारी और उच्च शिक्षा विभाग को चाहिए कि ऐसे कॉलेजों की सूची बनाकर उनकी मान्यता रद्द करे और शिक्षा को फिर से शिक्षा रहने दे, व्यापार नहीं।
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