मुंबई के तटीय क्षेत्र में स्थित जवाहर द्वीप पर हाल ही में एक नया ऑयल टर्मिनल खोला गया, जिसे भारत का पहला पूरी तरह से प्लास्टिक‑मुक्त टर्मिनल कहा जा रहा है। इस सुविधा का निर्माण भारतीय ऊर्जा मंत्रालय और पर्यावरण विभाग की संयुक्त पहल के तहत किया गया, जिसका उद्देश्य तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण व वितरण में प्लास्टिक के उपयोग को समाप्त करना है। टर्मिनल में पैकेजिंग, पाइपलाइन कवर, और अन्य सभी संरचनाओं में बायोडिग्रेडेबल या पुनर्नवीनीकरण सामग्रियों का उपयोग किया गया है, जिससे प्लास्टिक कचरे की मात्रा में 90 प्रतेशत से अधिक की कमी आने की उम्मीद है।
यह कदम भारतीय सरकार के 2025 तक प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के लक्ष्यों के अनुरूप है और वैश्विक स्तर पर बढ़ती पर्यावरणीय जागरूकता के बीच एक उदाहरणात्मक प्रोजेक्ट के रूप में देखा जा रहा है। टर्मिनल के प्रबंधन के अनुसार, सभी टैंक और पाइपलाइन कवर को रीसायक्ल्ड पॉलीएथिलीन से बदला गया है, जबकि टैंकों के अंदर इस्तेमाल होने वाली सुरक्षा परतों के लिए बायोप्लास्टिक आधारित कंपोजिट्स अपनाए गए हैं। इसके अलावा, टर्मिनल में एक समर्पित कचरा प्रबंधन इकाई भी स्थापित की गई है, जो प्लास्टिक‑रहित कचरे को अलग करके रीसायक्लिंग या ऊर्जा उत्पादन के लिए भेजती है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल पर्यावरणीय प्रभाव को घटाती है, बल्कि तेल उद्योग में लागत‑प्रभावशीलता और स्थिरता के नए मानक भी स्थापित करती है। यदि इस मॉडल को अन्य टर्मिनलों में भी लागू किया जाता है, तो भारत के तेल और गैस क्षेत्र में प्लास्टिक कचरे को शून्य करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।