** पीएम विश्वकर्मा योजना के तीन वर्ष पूरे, 30 लाख कारीगर पंजीकृत
Naitik Chakravarti Times
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** पीएम विश्वकर्मा योजना के तीन वर्ष पूरे होने पर रिपोर्ट है कि 30 लाख से अधिक कारीगर पंजीकृत हुए हैं, जिससे ग्रामीण उद्यमिता और रोजगार पर गहरा प्रभाव पड़ा है।
** पिछले तीन वर्षों में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PMWS) ने भारत के ग्रामीण और शहरी कारीगरों के लिए एक नया आयाम स्थापित किया है। 2023 में प्रारम्भ हुई यह योजना कारीगरों के लिए प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और विपणन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू हुई थी। अब तक 30 लाख से अधिक कारीगरों का पंजीकरण हो चुका है, जो कि योजना के लक्षित 40 लाख से कम है, परंतु यह आंकड़ा ग्रामीण उद्यमिता के बढ़ते रुझान को दर्शाता है। पंजीकृत कारीगरों को सरकार द्वारा 1.5 लाख रुपये तक की अनुदान राशि, बैंक ऋण सुविधा और डिजिटल मार्केटप्लेस पर उत्पाद सूचीबद्ध करने का लाभ मिलता है।
इन लाभों के चलते कई कारीगरों ने अपने हस्तशिल्प को बड़े पैमाने पर उत्पादन में बदल दिया है। विशेष रूप से कपड़ा, लकड़ी, मेटल वर्क और मिट्टी के बर्तन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं। साथ ही, योजना के तहत चल रहे डिजिटल कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम ने कारीगरों को ऑनलाइन बिक्री के लिए आवश्यक तकनीकी ज्ञान प्रदान किया है। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधि में भी स्फूर्ति आई है।
हालांकि, कुछ चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। पंजीकरण प्रक्रिया में नौकरशाही बाधाएँ, सीमित वित्तीय जागरूकता और डिजिटल साक्षरता की कमी कुछ कारीगरों को योजना के लाभों से वंचित रखती हैं। सरकार ने इन समस्याओं को दूर करने के लिए क्षेत्रीय कारीगर केंद्रों की स्थापना और मोबाइल ऐप के माध्यम से सहायता सेवाएँ उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। भविष्य में, पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत कारीगरों की संख्या 50 लाख तक पहुँचाने का लक्ष्य है, जिससे ग्रामीण रोजगार और आत्मनिर्भरता को और मजबूती मिलेगी।