भारत के 2024‑25 वित्तीय वर्ष में उत्पादन, निवेश और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। नई सरकारी पहलों और विदेशी निवेश ने आर्थिक माहौल को सुदृढ़ किया, जबकि महंगाई जैसी चुनौतियों का सामना किया गया।
भारत में व्यवसायिक माहौल 2024‑25 वित्तीय वर्ष में उल्लेखनीय परिवर्तन देख रहा है, जहाँ राष्ट्रीय उत्पादन में 7.2 % की वार्षिक वृद्धि दर्ज हुई। इस वृद्धि का मुख्य कारण विनिर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी और ई‑कॉमर्स क्षेत्रों में निवेश में 15.4 % की बढ़ोतरी है। सरकार ने मार्च 2024 में लागू किए गए 'मेक इन इंडिया 2.0' पहल के तहत छोटे एवं मध्यम उद्यमों (SMEs) को 12 अरब रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की, जिससे 1.8 लाख नई कंपनियों की स्थापना हुई। इन आँकों से स्पष्ट है कि भारतीय व्यवसाय ने निरंतर विस्तार की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं। यह विकास न केवल रोजगार सृजन में योगदान देता है, बल्कि निर्यात में भी सकारात्मक प्रभाव डालता है।
वित्तीय वर्ष के पहले छः महीनों में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) में 2.9 अरब डॉलर की वृद्धि हुई, जिससे कुल निवेश 45.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया। प्रमुख निवेशकों में सिंगापुर, जर्मनी और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं, जिन्होंने क्रमशः 0.8, 0.6 और 0.5 अरब डॉलर की राशि निवेश की। इस प्रवाह ने औद्योगिक पार्कों और तकनीकी हबों में नई परियोजनाओं को गति दी, जहाँ 3.4 लाख रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए। सरकार की "डिजिटल इंडिया" नीति ने इन निवेशों को सहज बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
व्यवसायिक विकास के साथ ही महंगाई और श्रम लागत में वृद्धि भी प्रमुख चुनौतियां बनकर सामने आई। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) ने अप्रैल 2024 में 5.8 % का स्तर छुआ, जबकि औद्योगिक उत्पादन में 4.3 % की दर से वृद्धि हुई। इसके जवाब में केंद्रीय बैंक ने बैंकों के रेपो दर को 6.5 % पर स्थिर रखा, जिससे वित्तीय स्थिरता बनी रही। साथ ही, नई कर नीति ने छोटे व्यापारियों के लिए कर भार को 12 % से घटाकर 9 % कर दिया, जिससे लाभ मार्जिन में सुधार हुआ।
2024‑25 में वस्तु निर्यात में 9.1 % की वृद्धि हुई, जिससे कुल निर्यात मूल्य 420 अरब डॉलर तक पहुंच गया। मुख्य निर्यात वस्तुओं में इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोबाइल घटकों ने क्रमशः 12 % , 10 % और 8 % की गति दर्ज की। इस सुधार का एक प्रमुख कारण नई व्यापार समझौते (FTA) का कार्यान्वयन है, जिसने दक्षिण एशिया और अफ्रीकी बाजारों में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई।
आगामी वर्ष में सरकार ने "स्टार्टअप इंडिया 2025" योजना के तहत 5 अरब रुपये की अतिरिक्त फंडिंग का ऐलान किया, जिसका उद्देश्य नवाचार‑आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करना है। इस योजना के तहत 10 हज़ार स्टार्टअप्स को सीड फंडिंग, मेंटरशिप और अंतर्राष्ट्रीय बाजार पहुंच प्रदान की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समर्थन निरंतर बना रहा, तो 2025‑26 में भारत की कुल व्यावसायिक उत्पादन में 8 % की अतिरिक्त वृद्धि संभव हो सकती है।
समग्र रूप में, 2024‑25 की पहली छमाही ने भारतीय व्यवसाय को मजबूत आधार प्रदान किया है, और निरंतर नीति समर्थन के साथ यह वृद्धि स्थायी रूप से जारी रहने की संभावना है।