केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भारत के समुद्री भविष्य के केंद्र में वैश्विक साझेदारी, युवाओं और महिलाओं को रखा है
Naitik Chakravarti Times
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मंत्री सोनोवाल ने कहा कि भारत की समुद्री नीतियों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देते हुए युवा और महिला शक्ति को प्रमुख भूमिका में लाना देश की जलसंधि सुरक्षा और आर्थिक विकास की कुंजी है।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने राष्ट्रीय समुद्री नीति पर अपने नवीनतम बयानों में स्पष्ट किया कि भारत का समुद्री भविष्य वैश्विक साझेदारियों, युवा प्रतिभा और महिला सहभागिता के त्रिकोणीय आधार पर स्थापित होगा। उन्होंने बताया कि भारत ने हाल ही में जापान, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका और कई दक्षिण‑पूर्व एशियाई राष्ट्रों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय समझौतों को सुदृढ़ किया है, जिससे समुद्री सुरक्षा, तकनीकी नवाचार और पर्यावरणीय संरक्षण के क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार हो रहा है। इन समझौतों के तहत संयुक्त अभ्यास, समुद्री निगरानी प्रणालियों का साझा उपयोग और सतत समुद्री ऊर्जा परियोजनाओं पर काम किया जाएगा, जिससे भारत को अपनी रणनीतिक समुद्री सीमाओं की रक्षा करने में मदद मिलेगी।
सोनावल ने यह भी रेखांकित किया कि इस रणनीतिक दिशा में युवा और महिलाओं की भागीदारी को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने समुद्री अकादमियों, तकनीकी प्रशिक्षण केंद्रों और शिपबिल्डिंग क्लस्टरों में विशेष कोटा स्थापित किया है, जिससे विज्ञान‑प्रौद्योगिकी, नौसैनिक संचालन और लॉजिस्टिक्स में महिलाओं की उपस्थिति बढ़ेगी। साथ ही, युवा उद्यमियों को समुद्री स्टार्ट‑अप्स और नवाचार मंचों के माध्यम से वित्तीय और तकनीकी समर्थन प्रदान किया जा रहा है, जिससे नौजवानों को समुद्री व्यापार, मछली पालन और समुद्री पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।
इन पहलों को राष्ट्रीय समुद्री रणनीति "समुद्रगामी भारत" के अंतर्गत समेकित किया गया है, जिसका उद्देश्य न केवल समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करना बल्कि समुद्री संसाधनों से सतत आर्थिक लाभ उत्पन्न करना है। मंत्री सोनोवाल ने आशावाद व्यक्त किया कि वैश्विक साझेदारियों के साथ-साथ युवा और महिला शक्ति को केंद्र में रखकर भारत विश्व की प्रमुख समुद्री शक्ति के रूप में अपनी स्थिति को और सुदृढ़ कर सकेगा।