रक्षा मंत्री ने जैसलमेर में ‘भारतीय रक्षा बलों के आधुनिकीकरण’ पर रक्षा मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की
Naitik Chakravarti Times
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रक्षा मंत्री ने राजस्थान के जैसलमेर में आयोजित बैठक में भारतीय रक्षा बलों के आधुनिकीकरण पर चर्चा करते हुए समिति के कार्यों की समीक्षा की और भविष्य की रणनीतियों पर मार्गदर्शन दिया।
रक्षा मंत्री ने जैसलमेर के ऐतिहासिक परिसर में एक महत्वपूर्ण बैठक का उद्घाटन किया, जिसमें रक्षा मंत्रालय की सलाहकार समिति ने भारतीय रक्षा बलों के आधुनिकीकरण पर अपनी नवीनतम सिफारिशें प्रस्तुत कीं। समिति, जो रक्षा नीति, प्रौद्योगिकी और क्षमताओं के विषय में विशेषज्ञों से मिलकर बनी है, ने पिछले वर्ष में हुए उपकरण उन्नयन, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और रणनीतिक साझेदारियों के परिणामों का विस्तृत विश्लेषण साझा किया।
बैठक के दौरान मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि भारत को अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए न केवल उन्नत हथियार प्रणालियों पर निर्भर रहना है, बल्कि स्वदेशी शोध और विकास को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने बताया कि नई तकनीकों जैसे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और स्वचालित प्रणालियों को भारतीय रक्षा संरचना में समाहित करना आवश्यक है। समिति के प्रमुख ने बताया कि वर्तमान में 40% से अधिक उपकरण आधुनिकीकरण के तहत हैं, और आने वाले पाँच वर्षों में इस प्रतिशत को 60% तक पहुँचाने की योजना है।
इसके अलावा, रक्षा मंत्री ने रणनीतिक गठजोड़ और अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों पर भी चर्चा की, यह कहते हुए कि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए सहयोगी देशों के साथ तालमेल अनिवार्य है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि रक्षा बलों के आधुनिकीकरण के साथ-साथ सैनिकों की भलाई और मनोबल को भी बढ़ाने के लिए मनोवैज्ञानिक सहायता कार्यक्रमों को सुदृढ़ किया जाना चाहिए। बैठक के अंत में समिति ने अगले चरण के कार्यान्वयन के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तावित की, जिसे रक्षा मंत्रालय द्वारा स्वीकृति के लिए आगे भेजा जाएगा।