** रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिंद‑प्रशांत क्षेत्रीय संवाद‑2026 में कहा: समुद्री आपूर्ति शृंखला में विविधता और सहयोग आवश्यक
Naitik Chakravarti Times
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** सुरक्षा के तनावपूर्ण माहौल में, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समुद्री क्षेत्र में आपसी निर्भरता को सुदृढ़ करने हेतु आपूर्ति शृंखला में विविधता और क्षेत्रीय सहयोग को प्रमुखता दी।
** हिंद‑प्रशांत क्षेत्रीय संवाद‑2026 के मंच पर रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने अपने प्रमुख बिंदु रखे, जिसमें कहा गया कि वर्तमान में बढ़ते सुरक्षा तनाव के बीच समुद्री क्षेत्र में आपसी निर्भरता को मजबूत करना भारत की रणनीतिक प्राथमिकता है। उन्होंने उल्लेख किया कि चीन की बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति, उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण और दक्षिण चीन सागर में क्षेत्रीय विवादों ने इस क्षेत्र में अस्थिरता को बढ़ा दिया है। ऐसे परिदृश्य में, भारत को अपनी समुद्री आपूर्ति शृंखलाओं को विविधित करके एकाधिक साझेदारों पर निर्भरता को संतुलित करना आवश्यक है, ताकि किसी एकल स्रोत पर जोखिम कम किया जा सके।
संवाद‑2026 में उपस्थित प्रमुख देशों—संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, तथा दक्षिण‑पूर्व एशिया के कई ASEAN सदस्य—के साथ भारत ने आपूर्ति शृंखला की लचीलापन बढ़ाने के लिए कई पहलें प्रस्तावित कीं। इन पहल में पोर्ट्स एवं लॉजिस्टिक हब का सामूहिक विकास, डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम का साझा उपयोग, तथा आपूर्ति शृंखला में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए संयुक्त अभ्यास शामिल हैं। मंत्री सिंह ने कहा, “समुद्री सुरक्षा केवल नौसैनिक शक्ति से नहीं, बल्कि विश्वसनीय लॉजिस्टिक नेटवर्क और आपसी विश्वास से संभव है। हमें अपने समुद्री व्यापार मार्गों को विविधित कर, वैकल्पिक बंदरगाहों और जलमार्गों को विकसित करना होगा, जिससे किसी भी अचानक व्यवधान का प्रभाव कम हो सके।”
इन बयानों के साथ ही, भारत ने क्षेत्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए एक नया ‘हिंद‑प्रशांत समुद्री सहयोग मंच’ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा, जिसका उद्देश्य नियमित रूप से आपूर्ति शृंखला के जोखिम मूल्यांकन, आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र और सामरिक संवाद को सुदृढ़ करना होगा। इस पहल को सभी सहभागी देशों की सकारात्मक