भारत में प्रौद्योगिकी का उभरता परिदृश्य: चुनौतियाँ और अवसर
Naitik Chakravarti Times
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डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसी पहलों के तहत भारत में तकनीकी प्रगति तेज़ी से बढ़ी है, लेकिन डिजिटल असमानता और साइबर सुरक्षा जैसी चुनौतियों को भी संबोधित करना आवश्यक है।
डिजिटल युग में प्रौद्योगिकी ने भारत की सामाजिक, आर्थिक और रणनीतिक संरचनाओं को गहराई से बदल दिया है। पिछले दस वर्षों में इंटरनेट उपयोगकर्ता संख्या 150 करोड़ से बढ़कर 210 करोड़ तक पहुंची, जबकि मोबाइल broadband की गति में दो गुना सुधार हुआ है। इस तेज़ी से विकसित हो रहे माहौल में सरकार ने डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसे पहल के माध्यम से नवाचार को प्रोत्साहित किया है। इन नीतियों ने न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाई है, बल्कि छोटे और मध्यम उद्यमों को भी वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धी बनाते हुए नई नौकरियों का सृजन किया है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग ने उत्पादन, स्वास्थ्य और वित्तीय सेवाओं में नई संभावनाएँ खोल दी हैं। भारत में 2023 में AI स्टार्टअप्स की संख्या 1,200 तक पहुंची, जिससे निवेश में 15 अरब डॉलर की वृद्धि हुई। स्वचालित रोग निदान, चैटबॉट ग्राहक सहायता और पूर्वानुमानित रखरखाव जैसी तकनीकें अब बड़े अस्पतालों और औद्योगिक पार्कों में नियमित रूप से लागू हो रही हैं, जिससे दक्षता में 30 प्रतिशत तक सुधार देखा गया है।
नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। सौर पैनल की औसत लागत 2022 में 30 रुपये प्रति वाट से घटकर 2025 में 20 रुपये प्रति वाट होने का अनुमान है, जिससे भारत ने 2024 तक 120 गीगावॉट क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया है। बैटरी भंडारण और स्मार्ट ग्रिड समाधान के एकीकरण से ग्रामीण electrification दर 2024 में 95 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है, जो ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय लक्ष्य दोनों को सुदृढ़ करती है।
इन उपलब्धियों के बावजूद कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं। डिजिटल साक्षरता का अंतर अभी भी 35 प्रतिशत से अधिक है, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्ग वर्ग में। साइबर सुरक्षा के उल्लंघन में 2023 में 2,500 से अधिक बड़े डेटा चोरी के मामले दर्ज हुए, जिससे नियामक ढांचा सुदृढ़ करने की आवश्यकता स्पष्ट हुई। साथ ही, डेटा गोपनीयता और तकनीकी निर्भरता के प्रश्न नीति निर्माताओं को संतुलित दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
शिक्षा क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का एकीकरण तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय डिजिटल लिटरेसी मिशन 2024 में 80 प्रतिशत छात्रों को कोडिंग और डेटा विश्लेषण में बुनियादी कौशल प्रदान करने का लक्ष्य रखता है, और इस वर्ष 12 मिलियन छात्रों ने ऑनलाइन प्रमाणपत्र प्राप्त किए हैं। विश्वविद्यालयों ने AI, ब्लॉकचेन और क्वांटम कंप्यूटिंग पर विशेष पाठ्यक्रम शुरू किए हैं, जिससे उद्योग की मांग के अनुरूप कार्यबल तैयार हो रहा है।
सारांश में, भारत में प्रौद्योगिकी का विकास अवसरों और चुनौतियों दोनों को समेटे हुए है; नीतिगत समर्थन, निजी निवेश और सामाजिक सहभागिता के संतुलित मिश्रण से ही डिजिटल भविष्य को स्थायी और समावेशी बनाया जा सकता है।