भारतीय वायु सेना ने इस वर्ष के ड्रोनाथॉन में नवाचारी ड्रोन तकनीकों का प्रदर्शन किया, जिसमें देश के विभिन्न शैक्षणिक और उद्योग संस्थानों ने भाग लिया।
भारतीय वायु सेना ने इस वर्ष आयोजित ड्रोनाथॉन में देश भर के विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और निजी उद्योगों को एक मंच प्रदान किया, जहाँ उन्होंने स्वायत्त उड़ान, रीयल‑टाइम डेटा प्रोसेसिंग और एआई‑आधारित लक्ष्य पहचान जैसी उन्नत क्षमताओं वाले ड्रोन प्रस्तुत किए। यह कार्यक्रम पाँचवें संस्करण के रूप में आयोजित हुआ और इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी ड्रोन विकास को प्रोत्साहित करना, नवाचार को तेज़ करना और युवा इंजीनियरों को वास्तविक‑जगत की चुनौतियों से परिचित कराना था।
प्रतियोगिता में कुल 120 टीमों ने भाग लिया, जिनमें से 30 टीमों को अंतिम चरण में चयनित किया गया। अंतिम चरण में “स्वायत्त खोज‑और‑रिस्क्यू ड्रोन”, “उच्च‑ऊर्जा‑घनत्व बैटरी‑संचालित हाइपर‑लो‑सिग्नल ड्रोन” और “एआई‑संचालित इलेक्ट्रॉनिक जामिंग डिफेन्स सिस्टम” जैसी श्रेणियों में मूल्यांकन किया गया। विजेता टीम, जो एक राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान से थी, ने 30 किमी परिधि में 10 किमी तक की दूरी को स्वायत्त रूप से कवर करने वाले ड्रोन को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया, जिससे वायु सेना की दूरस्थ निगरानी और आपदा प्रबंधन क्षमताओं में संभावित सुधार का संकेत मिला।
भारतीय वायु सेना के प्रमुख ने कहा कि ड्रोनाथॉन ने स्वदेशी तकनीक के विकास में नई ऊर्जा प्रदान की है और भविष्य में इस मंच को और विस्तारित किया जाएगा, जिससे स्टार्ट‑अप और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष के परिणामों को आधार बनाकर वायु सेना अपने मौजूदा ड्रोन बेड़े में इन नवाचारों को एकीकृत करने की योजना बना रही है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय सहायता दोनों क्षेत्रों में दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।