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भारत में खेल विकास की नई दिशा: नीति, निवेश और अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धियां
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भारत में खेल विकास की नई दिशा: नीति, निवेश और अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धियां

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•29 सितंबर 2026 को 07:14 am बजे•3 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें

भारत ने खेल क्षेत्र में सरकारी योजना, निजी सहयोग और अंतरराष्ट्रीय सफलता के साथ उल्लेखनीय प्रगति की है। नई राष्ट्रीय खेल नीति और निवेश से युवा प्रतिभा को विश्व स्तर पर तैयार किया जा रहा है।

भारत में खेल क्षेत्र ने पिछले दशक में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है, जहाँ सरकार, निजी संस्थाएँ और खेल संगठनों ने संयुक्त रूप से आधारभूत संरचना, प्रशिक्षण और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में निवेश को तेज किया है। 2023 में राष्ट्रीय खेल नीति के पुनरावलोकन से खेल विज्ञान, महिला खिलाड़ियों के समर्थन और ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया। इस नीति के तहत 2024 तक 5,000 नई खेल अकादमी स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे युवा प्रतिभा को विश्व स्तर की तैयारी प्रदान की जा सके। साथ ही, भारत ने एशिया खेलों में कुल 112 पदक जीतकर अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को सुदृढ़ किया। इन उपलब्धियों ने स्तर पर खेल को आर्थिक विकास का एक प्रमुख स्तम्भ बना दिया है और भविष्य में ओलंपिक में मेडल संभावनाओं को बढ़ाया है।

सरकार ने 2024-2029 वित्तीय योजना में खेल विकास के लिए 12,500 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिसमें 3,200 करोड़ रुपये नई सुविधाओं के निर्माण, 2,800 करोड़ रुपये प्रशिक्षण केंद्रों के उन्नयन और 1,500 करोड़ रुपये खेल विज्ञान अनुसंधान के लिए निर्धारित हैं। खेल मंत्रालय ने विशेष रूप से एथलेटिक्स, तैराकी और बैडमिंटन जैसे ओलंपिक प्राथमिकता खेलों के लिए लक्ष्य निर्धारित किए हैं, जहाँ 2028 तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कम से कम दो गोल्ड मेडल जीतने की योजना है। इस योजना के कार्यान्वयन हेतु प्रत्येक राज्य को एक समन्वय समिति स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। इन निधियों का वितरण पारदर्शी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से होगा।

निजी क्षेत्र ने भी खेल के विकास में सक्रिय भूमिका निभाई है; प्रमुख कॉर्पोरेट समूहों ने 2023 में कुल 2,800 करोड़ रुपये स्पॉन्सरशिप और बुनियादी ढाँचा निर्माण में निवेश किया। टाटा, रिलायंस और एडीएफसी जैसी कंपनियों ने राष्ट्रीय खेल अकादमी के साथ साझेदारी कर उच्चस्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएँ प्रदान की हैं, जबकि मोबाइल एप्लिकेशन कंपनियों ने डिजिटल कोचिंग प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च कर ग्रामीण खिलाड़ियों तक पहुँच सुनिश्चित की है। इस सहयोग से 2025 तक 15,000 युवा एथलीट को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार तैयार करने की योजना बनाई गई है, जिससे प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है। इन प्रयासों से रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्कूल स्तर पर खेल को प्रोत्साहित करने के लिए 2024 में राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा मानक लागू किए गए, जिसमें हर स्कूल में कम से कम दो बहु-खेल मैदान और एक प्रमाणित कोच की उपलब्धता अनिवार्य की गई। शिक्षा मंत्रालय ने 2025 तक 20,000 शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से प्रमाणित करने का लक्ष्य रखा है, जिससे खेल के प्रति जागरूकता और प्रतिभा की पहचान में सुधार होगा। इसके अतिरिक्त, राज्य स्तर पर महिला खेल टीमों के लिए विशेष स्कॉलरशिप योजनाएँ शुरू की गई हैं, जिनमें प्रतिवर्ष 1,200 छात्राओं को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की खेल उपलब्धियों में 2024 एशिया खेलों में 112 पदक जीतना, 2025 विश्व एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में 10 नई रिकॉर्ड स्थापित करना और 2026 के कोरियन डॉर्बी में महिला हॉकी टीम का सेमीफाइनल पहुँचना शामिल है। इन सफलताओं के मद्देनज़र, भारतीय ओलंपिक समिति ने 2028 लंदन समर ओलंपिक के लिए तैयारियों को तेज करने हेतु एक समग्र रणनीति तैयार की है, जिसमें उच्च प्रदर्शन वाले 350 एथलीटों को विशेष प्रशिक्षण, पोषण और मनोवैज्ञानिक समर्थन प्रदान किया जाएगा। इस रणनीति के तहत 2027 में दो अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाएगा, जिससे भारतीय खेल प्रतिभा को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकेगा।
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