एनएचआरसी के हस्तक्षेप से हैदराबाद के केंद्रीय कारागार में विविध लैंगिक पहचान वाले कैदियों के लिये लिंग‑तटस्थ प्रकोष्ठ की स्थापना
Naitik Chakravarti Times
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एनएचआरसी के हस्तक्षेप से हैदराबाद के केंद्रीय कारागार में विविध लैंगिक पहचान और अभिव्यक्ति वाले लोगों के लिए लिंग-तटस्थ प्रकोष्ठ की स्थापना की गई
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने हाल ही में हैदराबाद के केंद्रीय कारागार में विविध लैंगिक पहचान एवं अभिव्यक्ति (एलजीबीटीक्यू+) वाले कैदियों की सुरक्षा के लिये लिंग‑तटस्थ प्रकोष्ठ की स्थापना की सिफ़ारिश की। यह कदम कई सालों से जारी रहने वाले शिकायतों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुपालन की दिशा में उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट के 2014 के नालसा‑सिंधु निर्णय एवं 2018 में धारा 377 के निराकरण के बाद, भारत में ट्रांसजेंडर और नॉन‑बायनरी व्यक्तियों के लिये विशिष्ट अधिकारों की मान्यता बढ़ी है, परन्तु कारागार प्रणाली में इन अधिकारों का कार्यान्वयन अभी भी अधूरा था। एनएचएलआरसी ने जेल प्रबंधन को बताया कि मौजूदा अलग‑अलग पिंजरे और शौचालय व्यवस्था ट्रांसजेंडर एवं नॉन‑बायनरी कैदियों के लिये भेदभावपूर्ण और असुरक्षित हैं, जिसके कारण कई मामलों में शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न की घटनाएँ दर्ज हुई थीं।
जेल प्राधिकरण ने आयोग की सिफ़ारिशों को मानते हुए एक विशेष प्रकोष्ठ तैयार किया है, जिसमें सभी लिंग‑पहचान वाले कैदियों को समान सुविधाएँ मिलेंगी। प्रकोष्ठ में दो‑स्तरीय सुरक्षा प्रणाली, निजी शौचालय, स्वास्थ्य‑सेवा एवं मनोवैज्ञानिक परामर्श सेवाएँ, तथा लिंग‑सेंसिटिव प्रशिक्षण प्राप्त कारागार स्टाफ की व्यवस्था की गई है। इस पहल के लिये एक स्वतंत्र निगरानी समिति भी गठित की गई है, जो प्रकोष्ठ की कार्यप्रणाली और अधिकारों के उल्लंघन की रिपोर्टिंग को नियमित रूप से समीक्षा करेगी। मानवाधिकार संगठनों ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि यह भारत में कारावास के दौरान लैंगिक विविधता के लिये एक मॉडल स्थापित कर सकता है, जबकि कुछ रूढ़िवादी समूहों ने सामाजिक मान्यताओं के प्रति संभावित चुनौतियों को लेकर आशंकाएँ व्यक्त