भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आगामी चंद्र मिशन के प्रमुख पहलुओं को रेखांकित करने वाली प्रेस विज्ञप्ति जारी की, जिसमें लॉन्च तिथि, तकनीकी नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उल्लेख है।
नई चंद्र मिशन के संबंध में इसरो ने आज एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी की, जिसमें अगले वर्ष के मध्य में लॉन्च की योजना बताई गई है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य चंद्र सतह पर विस्तृत भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण करना और संभावित जल स्रोतों की पहचान करना है। इसरो के प्रमुख वैज्ञानिकों ने बताया कि इस मिशन में नवीनतम इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर, लैंडर और रोवर सहित कई उन्नत उपकरण स्थापित किए जाएंगे, जो चंद्र के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्रों में पहले नहीं देखे गए डेटा प्रदान करेंगे। इसरो ने यह भी स्पष्ट किया कि मिशन की सफलता के लिए भारत ने यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और जापान की JAXA के साथ तकनीकी सहयोग को मजबूत किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक डेटा का साझा उपयोग संभव होगा।
पिछले दशक में भारत ने चंद्र अन्वेषण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, चंद्रयान‑1 से लेकर चंद्रयान‑3 तक, जिसने देश को अंतरिक्ष में स्वावलंबी बनाते हुए विश्व मंच पर एक प्रमुख स्थान दिलाया है। नई चंद्र मिशन को इस उपलब्धियों की निरंतरता माना जा रहा है, और इसरो के अनुसार यह मिशन भविष्य में संभावित चंद्र बुनियादी ढांचे—जैसे कि लूनर बेस या खनन सुविधाओं—के निर्माण के लिए आवश्यक वैज्ञानिक आधार तैयार करेगा। सरकार ने इस मिशन को राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति के तहत प्राथमिकता दी है, जिससे न केवल वैज्ञानिक समुदाय बल्कि भारतीय उद्योग और स्टार्ट‑अप इकोसिस्टम को भी नई प्रौद्योगिकियों के विकास के अवसर मिलेंगे। इसरो ने कहा कि मिशन के सभी चरणों की निगरानी के लिए विशेष कमांड सेंटर स्थापित किया गया है, और सार्वजनिक रूप से लाइव प्रसारण के माध्यम से जनता को भी इस यात्रा में भागीदारी का अवसर प्रदान किया जाएगा।