** प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महर्षि वाल्मीकि जयंती पर शुभकामनाएँ दीं
Naitik Chakravarti Times
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** प्रधानमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर उनके साहित्यिक एवं नैतिक योगदान को सम्मानित करते हुए, भारतीय संस्कृति के संरक्षण और विकास के लिए नई पहलों की घोषणा की।
** प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महर्षि वाल्मीकि जयंती के उपलक्ष्य में देशभर के नागरिकों को अभिवादन किया और इस महान कवि‑संस्थापक के योगदान को स्मरण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि जी ने केवल रामायण ही नहीं, बल्कि मानव मूल्यों, नैतिकता और सामाजिक समरसता का सुदृढ़ आधार स्थापित किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने भारतीय साहित्य और भाषाई विविधता के संरक्षण हेतु चल रही सरकारी योजनाओं, जैसे ‘भाषा संरक्षण मिशन’ और ‘साहित्यिक अभिवृद्धि पहल’, को दोहराते हुए, इन कार्यक्रमों के माध्यम से युवा पीढ़ी को प्राचीन ग्रंथों से परिचित कराना आवश्यक बताया।
वर्तमान में सरकार ने वाल्मीकि के श्लोकों और शिक्षाओं को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध कराने के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय परियोजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य शैक्षिक संस्थानों और सामान्य जन के लिए आसान पहुँच सुनिश्चित करना है। इस पहल के तहत वाल्मीकि रामायण के विभिन्न संस्करणों, उनके टिप्पणी ग्रंथों और अनुवादों को ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने कई राज्य सरकारों के साथ मिलकर वाल्मीकि जयंती के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों, साहित्यिक प्रतियोगिताओं और शैक्षिक कार्यशालाओं का आयोजन करने का संकल्प लिया है, जिससे भारतीय सभ्यता के मूलभूत सिद्धांतों को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जा सके।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि वाल्मीकि की शिक्षाएँ आज के सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करने में मार्गदर्शक सिद्ध हो सकती हैं। उन्होंने सभी नागरिकों को अपने दैनिक जीवन में सत्य, अहिंसा और कर्तव्यनिष्ठा के सिद्धांतों को अपनाने का आग्रह किया, जिससे राष्ट्र की प्रगति और सामाजिक एकता को बल मिले। इस प्रकार, महर्षि वाल्मीकि जयंती न केवल एक स्मरणोत्सव है, बल्कि राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक पुनरुद्धार और शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊर्जा का स्रोत भी बन कर उभरी है।