प्रधानमंत्री ने आचार्य विनोबा भावे को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी
Naitik Chakravarti Times
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प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित समारोह में आचार्य विनोबा भावे की सामाजिक और आध्यात्मिक योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने आचार्य विनोबा भावे की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह में कई प्रमुख राजनैतिक और सामाजिक नेताओं ने भाग लिया, जहाँ प्रधानमंत्री ने भावे जी के बंधु-भाई, सामाजिक सुधारक और राष्ट्रवादी विचारधारा के अग्रणी के रूप में योगदान को सराहा। उन्होंने कहा कि विनोबा भावे का बंधु आंदोलन, भूमि दान (भूदान) और अहिंसात्मक सामाजिक परिवर्तन के सिद्धांत आज के भारत में भी प्रासंगिक हैं, विशेषकर ग्रामीण विकास और सतत कृषि के क्षेत्रों में। प्रधानमंत्री ने सरकार की नई ग्रामीण पुनरुत्थान पहल को भावे के मूल्यों के साथ जोड़ते हुए कहा कि “हमारी नीतियों को उनके सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के सिद्धांतों से प्रेरित होना चाहिए।”
आचार्य विनोबा भावे, जिन्हें ‘भारत के महात्मा गांधी’ कहा जाता है, ने 1950 के दशक में भूदान आंदोलन के माध्यम से लाखों एकड़ जमीन गरीब किसानों को उपहार स्वरूप दी। उनका विचार था कि सामाजिक समरसता और आर्थिक समानता अहिंसा और नैतिक शक्ति से प्राप्त की जा सकती है। इस अवसर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों और सामाजिक संगठनों ने उनके जीवन और कार्यों पर शैक्षिक सत्र आयोजित किए, जिसमें उनके लेखन, पत्रिकाएँ और व्याख्यानों का पुनरावलोकन किया गया।
प्रधानमंत्री ने अंत में सभी उपस्थित लोगों से आचार्य के आदर्शों को अपनाने और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुँचाने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार आगामी वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि पुनर्वितरण, शैक्षिक साक्षरता और सामाजिक न्याय को सुदृढ़ करने के लिए विशेष योजनाएँ लागू करेगी, जिससे विनोबा भावे के ‘भूदान’ की भावना को आधुनिक भारत में पुनर्जीवित किया जा सके।