** भारत में कई दशकों से बंद और परित्यक्त खदानें पर्यावरणीय खतरा बन कर खड़ी हैं, परन्तु नवीनतम “सुविकल्प‑खदान पुनर्प्रयोजन उपकरण” के माध्यम से इनका पुनः उपयोग संभव हो रहा है, जिससे आर्थिक लाभ और पर्यावरणीय सुधार दोनों की संभावना बन रही है।

Naitik Chakravarti Times
अनुभवी पत्रकार और लेखक