प्रधानमंत्री ने गांधी स्मृति में आयोजित प्रार्थना सभा में भाग लिया और बापू के शाश्वत संदेश को याद किया
Naitik Chakravarti Times
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प्रधानमंत्री ने गांधी स्मृति में आयोजित प्रार्थना सभा में भाग लेकर बापू के शाश्वत संदेश को याद किया, यह रेखांकित करते हुए कि सत्य, अहिंसा और सामाजिक समरसता आज भी राष्ट्र के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत हैं।
प्रधानमंत्री ने आज गांधी स्मृति में आयोजित प्रार्थना सभा में भाग लिया, जिसमें देश के प्रमुख नेता, समाजसेवी और सामान्य नागरिक एकत्रित थे। यह कार्यक्रम भारत के स्वतंत्रता सेनानी महात्मा गांधी की याद में आयोजित किया गया, जहाँ उपस्थित सभी ने एकजुट होकर उनके शाश्वत संदेश—सत्य, अहिंसा, और समाज में समरसता—को पुनः पुष्टि की। प्रधानमंत्री ने संबोधन के दौरान गांधीजी के जीवन और कार्यों का संक्षिप्त स्मरण कराया और बताया कि आज की जटिल सामाजिक, आर्थिक और वैश्विक चुनौतियों के बीच भी गांधीजी के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है।
सभा के दौरान, प्रधानमंत्री ने गांधीजी द्वारा प्रोत्साहित "सत्याग्रह" की अवधारणा पर प्रकाश डाला, यह कहते हुए कि यह न केवल राजनीतिक संघर्षों में बल्कि रोज़मर्रा के जीवन की चुनौतियों में भी लागू किया जा सकता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि गांधीजी का अहिंसात्मक दृष्टिकोण आज के डिजिटल युग में भी संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान ढूँढने का एक प्रभावी मार्गदर्शक है। कार्यक्रम के अंत में, सभी ने मिलकर एक पवित्र प्रार्थना की, जिसमें गांधीजी की शांति और एकता की कामना की गई। इस प्रार्थना सभा ने यह स्पष्ट कर दिया कि गांधीजी का संदेश आज भी भारतीय समाज के मूल्यों और नीतिगत दिशा-निर्देशों को आकार देता है।