** ट्राई ने “दूरसंचार इंटरकनेक्शन (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026” जारी किए
Naitik Chakravarti Times
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** टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई ने दूरसंचार इंटरकनेक्शन (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026 को लागू किया, जिससे नेटवर्क इंटरकनेक्शन, शुल्क संरचना और सेवा गुणवत्ता में नई दिशा निर्धारित होगी।
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टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई ने आज “दूरसंचार इंटरकनेक्शन (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026” जारी किए, जो भारत में टेलीकॉम नेटवर्कों के बीच इंटरकनेक्शन प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाने का उद्देश्य रखते हैं। इस संशोधन में मौजूदा इंटरकनेक्शन शुल्क संरचना का पुनः मूल्यांकन, छोटे एवं मध्य आकार के ऑपरेटरों के लिए अधिक समान अवसर प्रदान करना, और अंत‑उपभोक्ता को बेहतर गुणवत्ता वाली सेवाएँ सुनिश्चित करना प्रमुख बिंदु हैं। नियामक ने कहा कि यह कदम तेज़ी से बदलते डिजिटल इकोसिस्टम में प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करेगा और नेटवर्क‑टू‑नेटवर्क ट्रांसफर में पारदर्शिता बढ़ाएगा।
विनियम में विशेष रूप से 5G और भविष्य की उन्नत सेवाओं के लिए इंटरकनेक्शन मानकों को सुदृढ़ किया गया है। इसमें बैकहॉल बैंडविड्थ की न्यूनतम आवश्यकताओं, कॉल ड्रॉप रेट और डेटा लेटेंसी के लिए स्पष्ट मानक निर्धारित किए गए हैं। साथ ही, शुल्क निर्धारण में “वास्तविक लागत” सिद्धांत को अपनाते हुए, बड़े ऑपरेटरों को छोटे खिलाड़ियों को अनुचित लाभ नहीं मिलने दिया गया है। इस दिशा में, ट्राई ने “समानता‑आधारित शुल्क मॉडल” प्रस्तुत किया, जिससे नेटवर्क उपयोग के वास्तविक मूल्य के आधार पर शुल्क तय होगा।
उद्योग प्रतिनिधियों ने इस पहल का स्वागत किया, लेकिन साथ ही उन्होंने नियामक से अपेक्षा जताई कि नियामक निकाय नई शर्तों के कार्यान्वयन में स्पष्ट समय‑सीमा और निगरानी तंत्र स्थापित करे। जियो, एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने कहा कि ये नियम प्रतिस्पर्धात्मक माहौल को सुदृढ़ करेंगे, परन्तु छोटे ऑपरेटरों को पर्याप्त समर्थन देना आवश्यक होगा। उपभोक्ता संगठनों ने भी संकेत दिया कि यदि नियामक इन विनियमों के प्रभाव