पुतला पहले फुंका गया, पुलिस बाद में जागी: ‘अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत’
Naitik Chakravarti Times
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जिला मुख्यालय पर समाजवादी पार्टी के प्रदर्शन के दौरान कुछ ऐसी ही चरितार्थ होती नजर आई।
पुतला पहले फुंका गया, पुलिस बाद में जागी: ‘अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत’
फतेहपुर। “अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत।” यह कहावत रविवार को जिला मुख्यालय पर समाजवादी पार्टी के प्रदर्शन के दौरान कुछ ऐसी ही चरितार्थ होती नजर आई। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका, जमकर नारेबाजी की और अपने कार्यक्रम को सफल बताया। उधर, पुतला जलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई का मोर्चा संभालते हुए मुकदमा दर्ज कर अपनी सक्रियता का एहसास करा दिया। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत समाजवादी पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता जिला अधिकारी कार्यालय परिसर पहुंचे। कार्यकर्ताओं के हाथों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला था। कार्यालय परिसर में पहुंचते ही केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू हो गई। देखते ही देखते पुतले की पहले पिटाई हुई और फिर उसे आग के हवाले कर दिया गया। दिलचस्प बात यह रही कि रविवार का दिन होने के बावजूद प्रदर्शन काफी देर तक चलता रहा। कार्यकर्ताओं ने नारे लगाए, पुतला फूंका और अपना विरोध दर्ज कराया, लेकिन मौके पर पुलिस की मौजूदगी नजर नहीं आई। जिला प्रशासन की ओर से भी कोई अधिकारी या प्रतिनिधि मौके पर दिखाई नहीं दिया। ऐसे में प्रदर्शनकारियों को विरोध दर्ज कराने की पूरी ‘आजादी’ मिलती नजर आई। हालात देखकर ऐसा लग रहा था मानो कोतवाली पुलिस से लेकर सर्किल स्तर के अधिकारियों तक को इस कार्यक्रम की भनक ही नहीं लगी। कार्यकर्ता अपना कार्यक्रम पूरा कर वापस लौट गए और उसके बाद पुलिस-प्रशासन की सक्रियता दिखाई दी। समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक विभिन्न क्षेत्रों में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन का कार्यक्रम प्रस्तावित है। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि जब कार्यक्रम की जानकारी पहले से थी, तो जिला मुख्यालय जैसे संवेदनशील स्थान पर पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी क्यों नहीं दिखाई दी? अब जब पुतला जल चुका, नारेबाजी हो चुकी और प्रदर्शनकारी लौट चुके हैं, तो कोतवाली पुलिस ने सपा जिलाध्यक्ष समेत दो दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। यानी जब पुतला सुरक्षित था तब पहरा गायब था और जब पुतला राख हो गया तो कार्रवाई पूरी तरह ‘सक्रिय’ हो गई। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई के बाद सियासी पारा भी चढ़ा हुआ है। सपा इसे अपने विरोध प्रदर्शन की कामयाबी मान रही है, जबकि पुलिस मुकदमा दर्ज कर अपनी कार्रवाई को जवाब बता रही है।