कैंसर की सस्ती दवाएं: नए सीमित मार्जिन का मरीजों पर क्या होगा असर
Naitik Chakravarti Times
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सरकार द्वारा ऑन्कोलॉजी दवाओं के मुनाफे पर नया मार्जिन कैप लागू करने से दवाओं की कीमतें घटने की उम्मीद है, परंतु आपूर्ति और अनुसंधान में संभावित बाधाओं पर भी चर्चा जारी है।
वर्ष 2026 में भारतीय सरकार ने ऑन्कोलॉजी दवाओं के उत्पादन और बिक्री पर 25 % का सीमित मार्जिन लागू किया है, जिसका उद्देश्य कैंसर रोगियों के लिए दवाओं की लागत कम करना है। इस नीति के अनुसार, दवाओं के निर्माता और आयातक केवल 25 % मुनाफा कमा सकते हैं, जबकि शेष लागत को लागत वसूलने के लिए उपयोग किया जा सकता है। उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस कदम से दवाओं की कीमतों में 10‑15 % की गिरावट हो सकती है, जिससे 1.5 करोड़ से अधिक कैंसर रोगियों को आर्थिक राहत मिलेगी।
हालांकि, दवा कंपनियों ने चेतावनी दी है कि मार्जिन कैप से अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश पर असर पड़ सकता है। वे तर्क देते हैं कि उच्च मुनाफा नवाचार के लिए आवश्यक है, विशेषकर दुर्लभ कैंसर के लिए नई दवाओं के विकास में। यदि मार्जिन को और घटाया जाता है तो कंपनियाँ भारतीय बाजार से निकलने पर भी विचार कर सकती हैं, जिससे दवाओं की उपलब्धता सीमित हो सकती है। नीति निर्माताओं ने इस चिंता को दूर करने के लिए एक फॉर्मूला पेश किया है, जिसमें दवाओं के दामों को नियंत्रित रखने के साथ-साथ R&D के लिए एक अलग अनुदान तंत्र शामिल है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि नीति का सफल कार्यान्वयन दवाओं की पहुँच बढ़ाने के साथ-साथ स्वास्थ्य बीमा योजनाओं और सार्वजनिक अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता को भी सुदृढ़ करेगा। रोगी संगठनों ने सरकार से आग्रह किया है कि दवा कंपनियों के साथ संवाद करते हुए, मार्जिन कैप के साथ-साथ दवा वितरण नेटवर्क में सुधार सुनिश्चित किया जाए। इस पहल के तहत, दवाओं की कीमतें कम होने के बावजूद, मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए आपूर्ति श्रृंखला और स्वास्थ्यसेवा अवसंरचना में सुधार आवश्यक है।