पुस्तकें जीवन बदलने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम: लोक सभा अध्यक्ष
Naitik Chakravarti Times
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लोक सभा अध्यक्ष ने संसद में कहा कि पुस्तकों की शक्ति से व्यक्तियों के जीवन में बदलाव और समाज में सुधार संभव है, और पढ़ने के महत्व पर बल दिया।
लोक सभा के अध्यक्ष ने आज की बहस के दौरान एक स्पष्ट संदेश दिया कि पुस्तकें केवल ज्ञान का भंडार नहीं हैं, बल्कि वे जीवन को बदलने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि “पुस्तकें हमें नयी सोच, सहानुभूति और समावेशी दृष्टिकोण देती हैं, जो व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ सामाजिक समरसता को भी प्रोत्साहित करती हैं।”
इस वक्तव्य के साथ उन्होंने देश में चल रहे साक्षरता और पुस्तक वितरण कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला। अध्यक्ष ने विशेष रूप से “पढ़ो भारत” पहल के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पुस्तकालयों के निर्माण तथा डिजिटल पाठ्यक्रमों के प्रसार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि कई बार शिक्षा के प्रति जागरूकता का अभाव ही सामाजिक प्रगति में बाधा बनता है, जबकि साक्षरता से सशक्त नागरिक समाज के लिए आधार तैयार होता है।
अध्यक्ष ने यह भी उल्लेख किया कि सरकार ने हाल ही में ‘पुस्तकें और पाठ्यक्रम’ योजना के तहत प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता सुधारने के लिए धनराशि बढ़ाई है। उन्होंने संसद के सदस्यों से आग्रह किया कि वे इस दिशा में कार्यरत शिक्षकों और पुस्तकालयों के प्रति समर्थन बढ़ाएँ, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ ज्ञान के प्रकाश में नयी दिशा तय कर सकें। इस प्रकार, अध्यक्ष के शब्दों ने एक बार फिर यह याद दिला दिया कि ज्ञान की रोशनी से समाज का परिवर्तन संभव है।