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** सीएसआईआर‑एनआईएससीपीआर ने सीडीटीके‑2026 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल समापन, २५ साल पुरानी “इंडियन जर्नल ऑफ ट्रेडिशनल नॉलेज” की उपलब्धियों को श्रद्धांजलि
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** सीएसआईआर‑एनआईएससीपीआर ने सीडीटीके‑2026 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल समापन, २५ साल पुरानी “इंडियन जर्नल ऑफ ट्रेडिशनल नॉलेज” की उपलब्धियों को श्रद्धांजलि

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•4 नवंबर 2026 को 05:24 am बजे•0 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें

** सीएसआईआर‑एनआईएससीपीआर द्वारा आयोजित सीडीटीके‑2026 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ने पारम्परिक ज्ञान के संरक्षण व आधुनिक अनुप्रयोगों पर व्यापक चर्चा को मंच दिया, साथ ही ‘इंडियन जर्नल ऑफ ट्रेडिशनल नॉलेज’ के २५ वर्ष पूर्ण होने का जश्न मनाया गया।

**
राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीएसआईआर) की सहायक संस्था भारतीय पारम्परिक ज्ञान अनुसंधान परिषद (एनआईएससीपीआर) ने इस वर्ष आयोजित “कॉन्फ़्रेंस ऑन डिफ़रेंटिएटेड ट्रांसफर ऑफ़ ट्रैडिशनल नॉलेज एंड एप्प्लिकेशन्स 2026” (सीडीटीके‑2026) का सफल समापन किया। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर ५० से अधिक देशों के १,२०० से अधिक शोधकर्ता, विद्वान और उद्योग विशेषज्ञ उपस्थित थे, जिन्होंने आयुर्वेद, योग, वैदिक विज्ञान, पारम्परिक कृषि, तथा स्वदेशी औषधियों जैसे विविध क्षेत्रों में नवीनतम शोध成果 प्रस्तुत किए। सम्मेलन के मुख्य सत्रों में पारम्परिक ज्ञान को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर संरक्षित करने, बायोटेक्नोलॉजी के माध्यम से औषधीय गुणों की पुष्टि करने, तथा स्थानीय समुदायों के अधिकारों को सुदृढ़ करने के लिए नीति‑निर्माण पर चर्चा प्रमुख रही।

समापन समारोह में भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के प्रमुख ने “इंडियन जर्नल ऑफ ट्रेडिशनल नॉलेज” (आईजेटीके) के २५ वर्ष पूरे होने पर विशेष उल्लेख किया। 199९ में स्थापित यह जर्नल, पारम्परिक विज्ञान के अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त प्रकाशन के रूप में विकसित हुआ है और अब तक १,००० से अधिक मूल शोध लेख प्रकाशित कर चुका है। इस अवसर पर जर्नल के संपादकीय बोर्ड ने आगामी पाँच वर्षों के लिए खुले एक्सेस, बहुभाषी सारांश, तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोगी विशेष अंक की योजना का खुलासा किया, जिससे भारतीय पारम्परिक ज्ञान को वैश्विक मंच पर और अधिक दृढ़ता से स्थापित किया जा सके।

सीडीटीके‑2026 ने न केवल वैज्ञानिक समुदाय में पारम्परिक ज्ञान के पुनरुत्थान को सुदृढ़ किया, बल्कि नीति‑निर्माताओं, उद्योग और स्थानीय समुदायों के बीच सहयोगी नेटवर्क को भी मजबूत किया। इस प्रकार, सम्मेलन ने भविष्य में पारम्परिक विज्ञान के सतत विकास और सामाजिक‑आर्थिक लाभ के लिए एक ठोस आधारशिला रखी।
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