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** गैर‑कानूनी गोद लेने के खिलाफ़ दिल्ली कार्यशाला ने अस्पताल, पुलिस, सीडब्ल्यूसी और कार्यकर्ताओं को एकजुट किया
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** गैर‑कानूनी गोद लेने के खिलाफ़ दिल्ली कार्यशाला ने अस्पताल, पुलिस, सीडब्ल्यूसी और कार्यकर्ताओं को एकजुट किया

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•11 सितंबर 2026 को 07:35 am बजे•1 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें

** दिल्ली में आयोजित कार्यशाला ने बाल गोद लेने के अवैध नेटवर्क को रोकने के लिए स्वास्थ्य संस्थानों, पुलिस, बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) और ज़मीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाकर सामूहिक रणनीति तैयार की।

**
पिछले कुछ महीनों में भारत में बाल गोद लेने के गैर‑कानूनी लेन‑देन की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है, जिससे बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं। इस संदर्भ में, दिल्ली सरकार, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और कई राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय गैर‑सरकारी संगठनों के सहयोग से आयोजित एक कार्यशाला ने इस समस्या के समाधान हेतु एक समन्वित मंच प्रदान किया। इस कार्यशाला में प्रमुख अस्पतालों के प्रमुख, पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य और विभिन्न ज़मीनी स्तर के कार्यकर्ता शामिल हुए। सभी ने बताया कि गोद लेने की प्रक्रिया में दस्तावेज़ीकरण की कमी, अनैतिक मध्यस्थों की भागीदारी और निगरानी प्रणाली की कमजोरियों के कारण अवैध लेन‑देन बढ़ रहे हैं।

कार्यशाला में प्रस्तुत किए गए मुख्य बिंदुओं में अस्पतालों को गोद लेने से जुड़े सभी चिकित्सा दस्तावेज़ों की सख्त जाँच करने, पुलिस को केस ट्रैकिंग और त्वरित कार्रवाई के लिए विशेष इकाइयाँ स्थापित करने, तथा सीडब्ल्यूसी को गोद लेने के मामलों में स्वतंत्र निगरानी और समय‑समय पर ऑडिट करने की सिफारिशें शामिल थीं। ज़मीनी कार्यकर्ताओं ने स्थानीय समुदायों में जागरूकता कार्यक्रम चलाने, संभावित शिकारों की पहचान करने और शिकायतों को तुरंत संबंधित प्राधिकरण तक पहुँचाने की भूमिका को रेखांकित किया। सभी पक्षों ने एक संयुक्त डेटाबेस बनाने पर सहमति व्यक्त की, जिससे गोद लेने की प्रक्रिया में शामिल सभी दस्तावेज़ों और अनुमोदनों की पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

इस पहल को सरकार ने बाल अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया और भविष्य में नियमित रूप से समान कार्यशालाओं का आयोजन करके नीति‑निर्माण में व्यावहारिक इनपुट शामिल करने का वचन दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्वास्थ्य, न्याय और सामाजिक कार्यक्षेत्र के सभी हितधारक मिलकर काम करेंगे तो गैर‑कानूनी गोद लेने के नेटवर्क को तोड़ना संभव होगा, जिससे बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण प्रदान किया जा सकेगा।
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