दिल्ली कार्यशाला ने गैर‑कानूनी गोद लेने के खिलाफ़ विभिन्न हितधारकों को एकजुट किया
Naitik Chakravarti Times
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अस्पताल, पुलिस, बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) और ज़मीनी कार्यकर्ताओं को शामिल करते हुए दिल्ली में आयोजित कार्यशाला ने अवैध गोद लेने की रोकथाम के लिए समन्वित रणनीति तैयार की।
दिल्ली में हाल ही में आयोजित एक बहु‑स्तरीय कार्यशाला ने गैर‑कानूनी गोद लेने के मुद्दे को लेकर विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख हितधारकों को एक ही मंच पर लाया। इस कार्यक्रम में सरकारी अस्पतालों के प्रमुख, पुलिस अधीक्षक, बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य, साथ ही कई सामाजिक संगठनों के ज़मीनी स्तर के कार्यकर्ता भाग ले रहे थे। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य अवैध गोद लेने की घटनाओं में बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने के लिए सूचना‑साझाकरण, त्वरित कार्रवाई और कानूनी प्रक्रियाओं की सुदृढ़ता पर चर्चा करना था। विशेषज्ञों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में अनधिकृत मध्यस्थों द्वारा बच्चों को बिना उचित जांच के गोद लेने के मामलों में वृद्धि हुई है, जिससे न केवल बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन होता है बल्कि सामाजिक विश्वास भी क्षीण होता है।
कार्यशाला में प्रस्तुत किए गए प्रमुख बिंदुओं में अस्पतालों में जन्म पंजीकरण को सख्त बनाना, पुलिस द्वारा प्रारम्भिक रिपोर्टिंग तंत्र को तेज़ करना, और सीडब्ल्यूसी को केस फॉलो‑अप में अधिक अधिकार देना शामिल था। साथ ही, ज़मीनी कार्यकर्ताओं को जागरूकता अभियानों और स्थानीय स्तर पर निगरानी नेटवर्क स्थापित करने के लिए प्रशिक्षित किया गया। प्रतिभागियों ने एक संयुक्त कार्य योजना पर हस्ताक्षर किए, जिसमें नियमित समन्वय बैठकें, एकीकृत डेटाबेस निर्माण और शून्य-सहिष्णुता नीति का पालन करने का संकल्प शामिल है। इस पहल को सरकार ने बाल अधिकारों की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के व्यापक प्रयासों के हिस्से के रूप में सराहा, और भविष्य में समान कार्यशालाओं को अन्य राज्यों में भी दोहराने की योजना बनाई गई है।
समग्र रूप से, इस कार्यशाला ने विभिन्न संस्थाओं के बीच सहयोग को औपचारिक रूप से स्थापित किया है, जिससे गैर‑कानूनी गोद लेने के खिलाफ़ त्वरित और प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी। यह कदम न केवल मौजूदा चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करता है, बल्कि बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए एक संरचनात्मक ढाँचा भी प्रदान करता है।