भारत की शिक्षा प्रणाली में डिजिटल परिवर्तन और चुनौतियाँ
Naitik Chakravarti Times
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भारत की शिक्षा प्रणाली में डिजिटल पहल, छात्र प्रदर्शन और शिक्षक प्रशिक्षण के नवीनतम आँकड़े प्रस्तुत करते हुए, यह लेख नीति बदलाव और भविष्य की चुनौतियों पर प्रकाश डालता है। आगे के वर्षों में समावेशी विकास के लिए सरकार की योजनाओं पर भी चर्चा की गई है।
भारत की शिक्षा प्रणाली, जो 2024-25 के शैक्षणिक वर्ष में प्रवेश कर रही है, ने पिछले दशक में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत, पाठ्यक्रम में समग्रता और कौशल विकास पर जोर दिया गया है, जबकि डिजिटल शिक्षा के प्रसार के लिए नई पहलें शुरू हुई हैं। इस वर्ष के आंकड़ों से पता चलता है कि प्राथमिक स्तर पर साक्षरता दर 70.5% तक पहुँच गई है, और माध्यमिक शिक्षा में महिला नामांकन 55% से ऊपर है। इन आंकड़ों के बावजूद, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच अभी भी असमानता बनी हुई है। यह अंतर शिक्षा के समग्र विकास के लिए चुनौती है और विकास आवश्यक।
केंद्र सरकार ने 2023 में डिजिटल शिक्षा मंच 'ई-शिक्षा पोर्टल' को विस्तारित किया, जिससे 1.2 करोड़ छात्रों को ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध हुए। इस प्लेटफ़ॉर्म पर, पाठ्यक्रमों को बहुभाषी रूप में उपलब्ध कराया गया, जिससे भाषाई बाधा घटाई गई। साथ ही, ग्रामीण शिक्षकों को डिजिटल टूल्स के उपयोग में प्रशिक्षण देने के लिए 15,000 कार्यशालाएँ आयोजित की गईं।
राष्ट्रीय शिक्षा सर्वेक्षण 2023 के अनुसार, 10 से 12 वर्ष के छात्रों के गणित और विज्ञान विषयों में औसत अंक 78% और 73% थे, जबकि 12 से 15 वर्ष के छात्रों के लिए ये अंक 74% और 69% थे। इस सर्वेक्षण से स्पष्ट है कि विज्ञान विषय में सुधार की आवश्यकता है, खासकर ग्रामीण विद्यालयों में।
शिक्षक गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए, सरकार ने 2024 में 'शिक्षक प्रगति कार्यक्रम' शुरू किया, जिसमें 5,00,000 शिक्षकों को नवीनतम शिक्षण विधियों पर प्रशिक्षण दिया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को प्रौद्योगिकी के साथ शिक्षण को जोड़ने की क्षमता प्रदान करना है, जिससे कक्षा में सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सके।
फिर भी, शिक्षा क्षेत्र को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रमुख चुनौतियों में अवसंरचना की कमी, शिक्षण सामग्री की उपलब्धता, और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की सीमितता शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, शिक्षकों के बीच डिजिटल साक्षरता का स्तर अभी भी औसत से कम है, जिससे ऑनलाइन शिक्षा के लाभों का पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा है।
आगामी वर्षों में, शिक्षा नीति में और भी सुधार की उम्मीद है। 2025-26 शैक्षणिक वर्ष के लिए योजना में, सरकार ने 10,000 नए डिजिटल कक्षाओं की स्थापना और 2,50,000 छात्रों के लिए मुफ्त डिजिटल पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। यह कदम शिक्षा के समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
इस प्रकार, भारत की शिक्षा प्रणाली में निरंतर सुधार के बावजूद, समावेशी और गुणवत्ता आधारित शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास और निवेश की आवश्यकता बनी हुई है।