भारत में शिक्षा सुधार: नीति, डिजिटल पहल और चुनौतियों का समग्र विश्लेषण
Naitik Chakravarti Times
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यह लेख 2024 में भारत में शिक्षा सुधार की प्रगति, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन, डिजिटल सीखने के प्लेटफ़ॉर्म की पहुँच और आगामी दो वर्षों के प्रमुख लक्ष्यों का विश्लेषण करता है। इसमें बुनियादी ढाँचे की चुनौतियों, शिक्षक अभाव और निजी‑सार्वजनिक साझेदारी की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया है।
भारत में शिक्षा प्रणाली का विकास आर्थिक प्रगति और सामाजिक समावेशन का प्रमुख आधार माना जाता है। पिछले दो दशकों में सरकारी और निजी दोनों स्तरों पर कई सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं, जिनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का कार्यान्वयन, डिजिटल सीखने के प्लेटफ़ॉर्म का विस्तार और बुनियादी ढाँचे में निवेश शामिल है। हालांकि, शहरी‑ग्रामीण अंतर, शिक्षक की कमी और तकनीकी पहुँच में असमानता जैसी चुनौतियाँ अभी भी प्रणाली की प्रभावशीलता को सीमित करती हैं। इस लेख में 2024 की उपलब्धियों, मौजूदा बाधाओं और अगले दो वर्षों के लक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को 2023 के अंत तक सभी राज्यों में पूर्ण रूप से लागू करने का लक्ष्य रखा गया था, और 2024 में मध्यवर्ती समीक्षा ने 78 प्रतिशत राज्यों ने पाठ्यक्रम सुधार और बहु‑भाषी शिक्षा के प्रमुख बिंदुओं को अपनाया बताया। इस प्रक्रिया में स्कूल स्तर पर कौशल‑आधारित सीखने के मॉड्यूल को शामिल करना और मूल्यांकन प्रणाली को निरंतरता के साथ अपडेट करना प्रमुख रहा। नीति के अनुसार 2025 तक प्राथमिक शिक्षा में 95 प्रतिशत छात्रगण को गुणवत्तापूर्ण सीखने का अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में कार्यवाही तेज़ हुई है। डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी प्लेटफ़ॉर्म DIKSHA ने 2024 में 12 करोड़ सक्रिय उपयोगकर्ताओं को आकर्षित किया, जिसमें 6.5 करोड़ छात्र और 3.2 करोड़ शिक्षक शामिल हैं। इस मंच पर 45,000 से अधिक शैक्षिक संसाधन उपलब्ध हैं, जो कक्षा 1 से 12 तक के पाठ्यक्रम को कवर करते हैं। साथ ही, भारत सरकार ने 2024 के वित्तीय वर्ष में डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए 1,500 करोड़ रुपये आवंटित किए, जिससे ग्रामीण स्कूलों में हाई‑स्पीड इंटरनेट की पहुँच में 68 प्रतिशत वृद्धि हुई। भौतिक बुनियादी ढाँचे के संदर्भ में 2024 में भारत में कुल 1.4 लाख सरकारी स्कूलों में से 12 प्रतिशत में अभी भी उचित कक्षा, पुस्तकालय या प्रयोगशाला की कमी है। शिक्षक अभाव की समस्या भी गंभीर है; 2024 के आंकड़ों के अनुसार 6.8 करोड़ छात्र-शिक्षक अनुपात 30:1 से बढ़कर 35:1 हो गया। इस अनुपात में वृद्धि का मुख्य कारण ग्रामीण क्षेत्रों में योग्य शिक्षकों की कमी और शहरी स्कूलों में अधिकतम वर्ग आकार है। सरकार ने 2024 में 2,500 नए शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की योजना घोषित की, लेकिन कार्यान्वयन में अभी प्रारम्भिक चरण है। निजी क्षेत्र ने शिक्षा में निवेश बढ़ाया है, विशेषकर डिजिटल लर्निंग टूल और कौशल विकास कार्यक्रमों में। 2024 में भारत में 3,200 निजी स्कूलों ने सार्वजनिक‑निजी साझेदारी (PPP) के तहत 1,200 नई कक्षाओं का निर्माण किया, जिससे लगभग 1.1 करोड़ छात्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया। इसके अलावा, एडटेक कंपनियों ने 2024 में 4,500 करोड़ रुपये का कुल निवेश किया, जिसमें ऑनलाइन ट्यूशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित व्यक्तिगत सीखने के समाधान और मूल्यांकन प्लेटफ़ॉर्म शामिल हैं। इन पहलों ने शहरी छात्रों के बीच डिजिटल सीखने की दर को 85 प्रतिशत तक पहुंचा दिया। आगामी दो वर्षों में भारत सरकार ने 2025-2026 के लिए शिक्षा में कुल 3,20,000 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया है, जिसमें 45 प्रतिशत राशि बुनियादी ढाँचा, 30 प्रतिशत डिजिटल पहल और 25 प्रतिशत शिक्षक प्रशिक्षण पर earmarked है। लक्ष्य 2025 तक सभी सरकारी स्कूलों में न्यूनतम 1.5 Mbps इंटरनेट कनेक्शन और 90 प्रतिशत स्कूलों में पूरी तरह कार्यशील विज्ञान प्रयोगशालाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इन रणनीतिक कदमों के सफल कार्यान्वयन से अपेक्षा है कि 2026 तक भारत में साक्षरता दर 78.5 प्रतिशत तक बढ़ेगी और अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा रैंकिंग में देशकी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आएगा।