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भारत में शिक्षा सुधार: चुनौतियाँ और भविष्य की दिशा
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भारत में शिक्षा सुधार: चुनौतियाँ और भविष्य की दिशा

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•5 अक्टूबर 2026 को 05:03 am बजे•0 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें

भारत की शिक्षा व्यवस्था 2024 में नए सुधारों के साथ आगे बढ़ रही है। साक्षरता दर 74.4% तक पहुँचने के बावजूद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में असमानता बनी हुई है। सरकार की नई नीतियों से शिक्षण गुणवत्ता और समावेशिता में सुधार का लक्ष्य है।

भारत के शिक्षा क्षेत्र में 2024 में बड़े पैमाने पर सुधार कार्यान्वित किये जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य शिक्षा की पहुँच, गुणवत्ता और समावेशिता को बढ़ाना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2024 के तहत 4.5% जीडीपी का बजट शिक्षा पर खर्च किया जा रहा है, जिससे शैक्षणिक बुनियादी ढाँचे और शिक्षक प्रशिक्षण में निवेश बढ़ रहा है। इस वर्ष के राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NEET-2024) में 8 लाख छात्रों ने भाग लिया, जो 2023 के मुकाबले 12% की वृद्धि दर्शाता है।

इन सुधारों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुँच में अभी भी अंतर स्पष्ट है। 2023 की जनगणना के अनुसार ग्रामीण साक्षरता दर 68% है, जबकि शहरी क्षेत्र में यह 84% तक पहुँचती है। इस असमानता को दूर करने के लिए सरकार ने ग्रामीण शिक्षण केंद्रों की संख्या में 15% वृद्धि का लक्ष्य रखा है, साथ ही डिजिटल शिक्षा प्लेटफार्मों के माध्यम से दूरस्थ शिक्षा को सुदृढ़ करने की योजना है।

शिक्षक प्रशिक्षण को प्राथमिकता देने के लिए 2024 में एक नई राष्ट्रीय शिक्षक प्रशिक्षण पहल शुरू की गई है, जिसमें 20,000 प्रशिक्षित शिक्षक को डिजिटल कौशल और समावेशी शिक्षण विधियों पर केंद्रित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों को नवीनतम शिक्षण तकनीकों से लैस करना और कक्षा में समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देना है। साथ ही, स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य और परामर्श सेवाओं को मजबूत करने के लिए 5,000 परामर्शदाता प्रशिक्षित किये जाने की योजना है।

साक्षरता दर में सुधार के लिए सरकार ने 2025 तक 80% की लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके तहत 12,000 नए प्राथमिक विद्यालय और 5,000 माध्यमिक विद्यालय खोलने का प्रावधान है। इन विद्यालयों में विशेष रूप से स्त्री और अल्पसंख्यक छात्रों के लिए स्कॉलरशिप और भोजन कार्यक्रम लागू किये जाएंगे, जिससे शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित हो सके।

उपरोक्त सभी प्रयासों के साथ, भारत सरकार ने शिक्षा को आर्थिक विकास का प्रमुख स्तंभ मानते हुए 2030 तक 90% साक्षरता दर प्राप्त करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सार्वजनिक-निजी साझेदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे शिक्षा क्षेत्र में नवाचार और निवेश में वृद्धि होगी। यह पहल न केवल शैक्षणिक परिणामों को बेहतर बनाएगी, बल्कि सामाजिक समरसता और आर्थिक समृद्धि में भी योगदान देगी।
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