** बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में काशी तमिल संगम 5.0 की तैयारियों की समीक्षा हेतु उच्च स्तरीय बैठक
Naitik Chakravarti Times
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** बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) ने वाराणसी में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में काशी तमिल संगम 5.0 के कार्यान्वयन की प्रगति, बजट आवंटन और सहयोगी संस्थानों की भागीदारी का विस्तृत मूल्यांकन किया।
** बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ने वाराणसी में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया, जिसमें काशी तमिल संगम 5.0 की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की गई। इस बैठक का नेतृत्व विश्वविद्यालय के कुलपति ने किया और इसमें BHU के विभिन्न संकायों के प्रमुख, राज्य सरकार के प्रतिनिधि, तमिलनाडु सांस्कृतिक विभाग के अधिकारी तथा कई प्रमुख शैक्षणिक और सांस्कृतिक संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल रहे। बैठक में पिछले चार संस्करणों के सफलतापूर्ण निष्पादन के बाद इस वर्ष के कार्यक्रम के लक्ष्यों, समय‑सारणी और वित्तीय संसाधनों पर चर्चा हुई। प्रमुख बिंदुओं में सांस्कृतिक मंचों, शैक्षणिक संगोष्ठियों, भाषा कार्यशालाओं और सामुदायिक सहभागिता के विस्तृत कार्यक्रमों का विवरण प्रस्तुत किया गया, जिससे दोनों क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक संवाद को सुदृढ़ करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की प्रतिबद्धता स्पष्ट हुई।
बैठक में काशी तमिल संगम 5.0 के मुख्य आयोजक समिति ने अब तक की तैयारियों का रिपोर्ट प्रस्तुत किया, जिसमें प्रमुख स्थल चयन, प्रतिभागी सूची, प्रचार‑प्रसार योजना और सुरक्षा प्रोटोकॉल शामिल थे। वित्तीय पक्ष में, केंद्रीय और राज्य स्तर से मिलने वाले अनुदान के साथ-साथ निजी प्रायोजकों की सहभागिता को भी सुनिश्चित किया गया, जिससे कार्यक्रम के लिये आवश्यक बजट का पर्याप्त आवंटन हो सके। साथ ही, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से दूरस्थ दर्शकों को जोड़ने के लिए लाइव स्ट्रीमिंग और इंटरैक्टिव एप्लिकेशन विकसित करने की योजना को भी मंजूरी मिली। इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देने और उत्तर-पूर्वी भारत तथा दक्षिण भारत के बीच शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ करने के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा गया।
बैठक के अंत में सभी पक्षों ने काशी तमिल संगम 5.0 को सफल बनाने हेतु समन्वित कार्यवाही करने की प्रतिबद्धता दोहराई। आगामी महीनों में विस्तृत कार्यसूची को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिससे कार्यक्रम के सभी आयाम – सांस्कृतिक, शैक्षणिक और सामाजिक – समय पर और प्रभावी ढंग से लागू हो सकें। यह समग्र समीक्षा काशी तमिल संगम को भारत के बहु-भाषी और बहुसांस्कृतिक परिदृश्य में एक प्रमुख मंच के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।