हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स, राष्ट्रीय संस्कृति कोष और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने धरोहर संरक्षण के लिए समझौता किया
Naitik Chakravarti Times
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एचएएल, एनसीएफ और एएसआई ने धरोहर स्थलों के संरक्षण, डिजिटल अभिलेखीयकरण और सतत विकास हेतु समझौता ज्ञापन (एमओए) पर हस्ताक्षर किए, जिससे प्रौद्योगिकी‑आधारित संरक्षण उपायों को तेज़ी से लागू किया जाएगा।
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), राष्ट्रीय संस्कृति कोष (एनसीएफ) और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने धरोहर स्थलों के संरक्षण और विकास के लिए एक व्यापक समझौता ज्ञापन (एमओए) पर हस्ताक्षर किए। इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य एचएएल की एयरोस्पेस तकनीक, जैसे कि ड्रोन‑आधारित सर्वेक्षण, 3‑डी स्कैनिंग और संरचनात्मक विश्लेषण, को एएसआई द्वारा प्रबंधित ऐतिहासिक स्मारकों की सुरक्षा में लागू करना है। साथ ही, एनसीएफ इस पहल को वित्तीय समर्थन प्रदान करेगा, जिससे डिजिटल अभिलेखीयकरण, पुनर्स्थापना कार्य और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को सुदृढ़ किया जा सके।
एमओए के तहत प्रारंभिक चरण में प्रमुख राष्ट्रीय धरोहरों, जैसे कि अजंता‑एलोरा, खजुराहो और कांचीपुरम के मंदिरों में तकनीकी सर्वेक्षण किया जाएगा। एचएएल द्वारा विकसित उच्च‑रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग और डेटा विश्लेषण उपकरणों से इन स्थलों की संरचनात्मक स्थिरता का मूल्यांकन किया जाएगा, जिससे संभावित क्षति का पूर्वानुमान और समय पर मरम्मत कार्य संभव हो सकेगा। एएसआई के विशेषज्ञ इन तकनीकी डेटा को पारंपरिक संरक्षण विधियों के साथ एकीकृत कर संरक्षित क्षेत्रों की पुनरावृत्ति रोकेंगे।
राष्ट्रीय संस्कृति कोष ने कहा है कि यह सहयोग न केवल सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि डिजिटल पर्यटन को भी प्रोत्साहित करेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को नई गति मिलेगी। भविष्य में इस साझेदारी को अन्य ऐतिहासिक क्षेत्रों तक विस्तारित करने की योजना है, जिससे भारत की सांस्कृतिक धरोहर को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ते हुए उसकी स्थायी रक्षा सुनिश्चित की जा सके।