“मैं हमेशा से राजनीति से नफ़रत करती थी” – सोनिया गांधी की पुस्तक ‘Belonging: A Journey of Love’ से अंश
Naitik Chakravarti Times
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अपनी नई आत्मकथात्मक कृति में सोनिया गांधी ने अपने शुरुआती वर्षों में राजनीति के प्रति झिझक और व्यक्तिगत संघर्षों को बयां किया, जो उनके सार्वजनिक जीवन की नई समझ प्रदान करता है।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रमुख हस्तियों में से एक, सोनिया गांधी ने हाल ही में प्रकाशित अपनी नई पुस्तक ‘Belonging: A Journey of Love’ से एक अंश सार्वजनिक किया, जिसमें उन्होंने खुलकर कहा कि “मैं हमेशा से राजनीति से नफ़रत करती थी”। यह बयान उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत में अनुभव किए गए आंतरिक टकराव को उजागर करता है। पुस्तक में वह अपने इटालियन मूल, इंदिरा गांधी के साथ विवाह, और राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश करने से पहले की निजी चुनौतियों को विस्तृत रूप से वर्णित करती हैं। उनका यह खुला बयान उन कई लोगों को आश्चर्यचकित कर रहा है, जिन्होंने उन्हें हमेशा से ही दृढ़ और समर्पित नेता के रूप में देखा है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस अंश से यह स्पष्ट होता है कि सोनिया गांधी ने अपने व्यक्तिगत भावनाओं और सार्वजनिक कर्तव्य के बीच संतुलन बनाने के लिए लंबी अवधि तक संघर्ष किया। वह अपने शुरुआती वर्षों में सामाजिक कार्यों और मानवीय कारणों में अधिक रुचि रखती थीं, जबकि राजनीति को एक अनिच्छित दायित्व के रूप में देखती थीं। समय के साथ, परिवार और पार्टी की अपेक्षाओं ने उन्हें राजनीतिक मंच पर खड़ा किया, जिससे वह धीरे-धीरे अपने विचारों और दृष्टिकोण को पुनः परिभाषित करती गईं। इस पुस्तक के माध्यम से वह न केवल अपने व्यक्तिगत विकास को दर्शाती हैं, बल्कि भारतीय राजनीति में महिलाओं की भूमिका, सांस्कृतिक विविधता, और राष्ट्रीय एकता के विषयों पर भी विचार प्रस्तुत करती हैं।
पुस्तक के प्रकाशन के बाद विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक समूहों ने इस अंश पर चर्चा शुरू कर दी है। कुछ ने इसे एक ईमानदार आत्मनिरीक्षण के रूप में सराहा, जबकि अन्य ने इस बयान को पार्टी के भीतर चल रहे नेतृत्व प्रश्नों के संदर्भ में देखा। कुल मिलाकर, सोनिया गांधी का यह खुलासा उनके जीवन के उन पहलुओं को उजागर करता है, जो अक्सर सार्वजनिक चर्चा से परे रह जाते हैं, और भारतीय राजनीति में व्यक्तिगत अनुभवों की भूमिका पर नई सोच को प्रेरित करता है।