महत्वपूर्ण खनिज भारत की ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम
Naitik Chakravarti Times
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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि दुर्लभ और रणनीतिक खनिजों की उपलब्धता भारत के ऊर्जा आत्मनिर्भरता, औद्योगिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने में निर्णायक भूमिका निभाती है।
केंद्रीय विज्ञान और तकनीकी मंत्रालय के प्रमुख डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज अपने हालिया भाषण में बताया कि लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट, दुर्लभ पृथ्वी धातुएँ और टैंटालम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की पर्याप्त आपूर्ति भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। इन खनिजों की कमी से नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और उन्नत रक्षा प्रणालियों के विकास में बाधा उत्पन्न हो सकती है। इस संदर्भ में सरकार ने राष्ट्रीय खनिज नीति को सुदृढ़ करने, अन्वेषण को तेज करने और निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें खनन लाइसेंस प्रक्रिया का सरलीकरण, तकनीकी सहयोग के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और स्वदेशी प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना शामिल है।
वर्तमान में भारत ने कई रणनीतिक पहलें शुरू की हैं, जैसे कि खनिज अन्वेषण के लिए डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का परिचय, सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत खनिज परिष्करण संयंत्रों का निर्माण, और आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन बढ़ाने हेतु विदेशी साझेदारियों का विस्तार। इन उपायों का उद्देश्य न केवल आयात पर निर्भरता कम करना है, बल्कि घरेलू उद्योगों को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन नीतियों को प्रभावी रूप से लागू किया गया, तो भारत अगले दशक में खनिज आयात में उल्लेखनीय कमी हासिल कर सकता है, जिससे ऊर्जा लागत में स्थिरता और रक्षा क्षमताओं में आत्मविश्वास बढ़ेगा। इस दिशा में सरकार ने निरंतर निगरानी और नीति समायोजन का वचन दिया है, ताकि भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों को दीर्घकालिक लाभ मिल सके।