भारत में सामाजिक सुरक्षा का विस्तार तेज़ी से हो रहा है, परंतु अभी भी अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों और ग्रामीण आबादी के बीच कवरेज में खामियाँ बनी हुई हैं।
भारत सरकार ने सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में कई योजनाएँ शुरू की हैं, जिनमें प्रधानमंत्री जन धन योजना, कर्मचारी भविष्य निधि योजना, प्रधानमंत्री रोजगार योजना, और ग्रामीण श्रमिकों के लिए ग्रामीण श्रमिक पेंशन योजना शामिल हैं। 2023‑24 के आंकड़ों के अनुसार, औपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों में 78 % ने पेंशन या बीमा कवरेज लिया है, जबकि अनौपचारिक क्षेत्र में यह दर केवल 35 % है। ग्रामीण और शहरी गरीबों के बीच इस असमानता को कम करने के लिए सरकार ने डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से पंजीकरण प्रक्रियाओं को सरल बनाया है, जिससे 15 % अधिक लोगों ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में नामांकन किया।
फिर भी, कवरेज में सुधार के बावजूद चुनौतियाँ बनी हुई हैं। अनौपचारिक श्रमिकों के बीच जागरूकता की कमी, सीमित पहुँच बिंदु, और प्रशासनिक जटिलताएँ प्रमुख बाधाएँ हैं। विशेषकर, माइक्रो, स्मॉल और मिडियम एंटरप्राइज़ (MSME) के कर्मचारियों के लिए पंजीकरण और योगदान की प्रक्रियाएँ अभी भी जटिल हैं, जिससे कई श्रमिक बिना किसी सुरक्षा के रह जाते हैं। इसके अलावा, कुछ राज्यों में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे की कमी है, जिससे ग्रामीण इलाकों में कवरेज का विस्तार धीमा पड़ रहा है।
इन समस्याओं से निपटने के लिए सरकार ने 2024 के बजट में सामाजिक सुरक्षा के लिए अतिरिक्त 5 % फंड आवंटित किया है और एक राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा पोर्टल के निर्माण की घोषणा की है, जो सभी योजनाओं के डेटा को एकीकृत करेगा। साथ ही, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने हेतु डिजिटल बैंकों और मोबाइल वॉलेट्स के साथ साझेदारी की जा रही है। यदि इन पहलों को समय पर लागू किया गया, तो भारत में सामाजिक सुरक्षा का कवरेज 2025‑26 तक 60 % से अधिक हो सकता है, जिससे अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों को भी आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।