गुरुवार, 5 नवंबर 2026
Englishहिन्दीਪੰਜਾਬੀ
नैतिक चक्रवर्ती टाइम्स
नैतिक चक्रवर्ती टाइम्स
होमई-पेपरवीडियोराष्ट्रीयराजनीतिव्यवसायप्रौद्योगिकीखेलस्वास्थ्यशिक्षा
टॉपराष्ट्रीयराजनीतिव्यवसायप्रौद्योगिकीखेलस्वास्थ्यशिक्षा

नैतिक चक्रवर्ती टाइम्स

Your News, Your Language

श्रेणियाँ

  • स्थानीय
  • राष्ट्रीय
  • राजनीति
  • व्यापार
  • प्रौद्योगिकी
  • खेल
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा

त्वरित लिंक

  • होम
  • ई-पेपर
  • वीडियो
  • आज की तस्वीर
  • हमारे बारे में
  • संपर्क करें
  • गोपनीयता नीति
  • नियम और शर्तें

न्यूजरूम

  • संपादकीय नीति
  • सुधार और शिकायतें
  • विज्ञापन
  • न्यूजरूम संपर्क
  • पत्रकार के रूप में जुड़ें

भाषाएँ

  • English
  • हिन्दी (Hindi)
  • ਪੰਜਾਬੀ (Punjabi)

हमें फॉलो करें

Email: naitikchakravartitimes@gmail.com

Phone: +91-9453515239

© 2026 Naitik Chakravarti Times Publications. सर्वाधिकार सुरक्षित

Designed and Developed byZeloiteZeloite
** श्रम शक्ति राष्ट्रीय विकास की आधारशिला है: डॉ. मनसुख मांडविया
  1. होम
  2. शिक्षा
शिक्षा

** श्रम शक्ति राष्ट्रीय विकास की आधारशिला है: डॉ. मनसुख मांडविया

Naitik Chakravarti TimesNaitik Chakravarti Times
•12 सितंबर 2026 को 01:43 am बजे•3 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें

** डॉ. मनसुख मांडविया ने राष्ट्रीय विकास में श्रम शक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कुशल और स्वस्थ कार्यबल ही आर्थिक प्रगति का मूलभूत स्तम्भ है।

**

वर्तमान आर्थिक परिप्रेक्ष्य में, भारत ने पिछले कुछ दशकों में तेज़ी से औद्योगिक और सेवा‑क्षेत्रीय विस्तार देखा है, परंतु इस विकास को स्थायी बनाने के लिये मानव संसाधन की गुणवत्ता को सुदृढ़ करना अनिवार्य माना जा रहा है। इस संदर्भ में, प्रख्यात अर्थशास्त्री और सामाजिक विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. मनसुख मांडविया ने हाल ही में राष्ट्रीय विकास मंच पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि “श्रम शक्ति राष्ट्रीय विकास की आधारशिला है” और यह कथन केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक भी है। मांडविया ने यह भी रेखांकित किया कि भारत की जनसंख्या शक्ति को यदि उचित शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल प्रशिक्षण के साथ जोड़ा जाए तो यह देश को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बना सकता है।

डॉ. मांडविया ने वर्तमान में श्रम शक्ति से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों को उजागर किया। वे बताते हैं कि अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम वेतन और कार्यस्थल की सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएँ अक्सर नहीं मिल पातीं। साथ ही, तकनीकी परिवर्तन और स्वचालन की गति के साथ कौशल अंतराल बढ़ रहा है, जिससे कई युवा रोजगार‑योग्य नहीं बन पा रहे हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिये उन्होंने कई नीतिगत उपाय प्रस्तावित किए, जिनमें राष्ट्रीय कौशल विकास पोर्टल का विस्तार, व्यावसायिक शिक्षा में उद्योग‑संबंधित पाठ्यक्रमों का समावेश, और स्वास्थ्य‑सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करने के लिये सार्वजनिक‑निजी साझेदारी मॉडल को लागू करना शामिल है।

सरकार ने इन सुझावों को ध्यान में रखते हुए पहले ही कई पहलें शुरू कर दी हैं, जैसे कि “स्मार्ट स्किल्स इनीशिएटिव” और “कुशल भारत मिशन” के तहत प्रशिक्षण केंद्रों का नेटवर्क बढ़ाना। डॉ. मांडविया ने इस बात पर बल दिया कि केवल सरकारी प्रयास ही नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थान और सामुदायिक संगठनों के सहयोग से ही श्रम शक्ति को सशक्त बनाया जा सकता है। उनका मानना है कि यदि इन सभी घटकों को समन्वित रूप से कार्य करने का अवसर मिले, तो श्रमिकों की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और राष्ट्रीय विकास की गति तेज़ होगी। इस प्रकार, श्रम शक्ति को राष्ट्रीय विकास की आधारशिला मानते हुए, सभी हितधारकों को मिलकर एक समग्र और सतत रणनीति अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
साझा करें:
Naitik Chakravarti Times

Naitik Chakravarti Times

अनुभवी पत्रकार और लेखक

More from शिक्षा

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) ने महिला नेतृत्व वाले एमएसएमई को सहायता प्रदान करने के लिए एसआरआई फंड पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की
शिक्षा

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) ने महिला नेतृत्व वाले एमएसएमई को सहायता प्रदान करने के लिए एसआरआई फंड पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की

5 नव॰ 2026
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) ने महिला नेतृत्व वाले एमएसएमई को सहायता प्रदान करने के लिए एसआरआई फंड पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की
शिक्षा

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) ने महिला नेतृत्व वाले एमएसएमई को सहायता प्रदान करने के लिए एसआरआई फंड पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की

5 नव॰ 2026
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में उच्च स्तरीय बैठक में काशी तमिल संगमम 5.0 की तैयारियों की समीक्षा
शिक्षा

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में उच्च स्तरीय बैठक में काशी तमिल संगमम 5.0 की तैयारियों की समीक्षा

5 नव॰ 2026
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में उच्च स्तरीय बैठक में काशी तमिल संगमम 5.0 की तैयारियों की समीक्षा
शिक्षा

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में उच्च स्तरीय बैठक में काशी तमिल संगमम 5.0 की तैयारियों की समीक्षा

5 नव॰ 2026
प्रधानमंत्री ने सत्य, ज्ञान और सदाचार के महत्व पर जोर देते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
शिक्षा

प्रधानमंत्री ने सत्य, ज्ञान और सदाचार के महत्व पर जोर देते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

5 नव॰ 2026
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में काशी तमिल संगमम 5.0 की तैयारियों की समीक्षा
शिक्षा

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में काशी तमिल संगमम 5.0 की तैयारियों की समीक्षा

5 नव॰ 2026