2024 में भारत की शिक्षा में प्रमुख परिवर्तन और चुनौतियां
Naitik Chakravarti Times
••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
राष्ट्रीय आँकड़ों के अनुसार 2024 में छात्र संख्या 28 करोड़, प्राथमिक उपस्थिति 95% और शिक्षा बजट 1.5 लाख करोड़ रुपये है। डिजिटल कक्षाओं, शिक्षक प्रशिक्षण और मौजूदा चुनौतियों की विस्तृत रिपोर्ट।
भारत में शिक्षा का परिदृश्य 2024 में कई महत्वपूर्ण बदलावों से गुजर रहा है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष कुल छात्र संख्या 28 करोड़ तक पहुंच गई है, जिसमें प्राथमिक स्तर पर 95 प्रतिशत उपस्थिति दर दर्ज की गई है। सरकार ने 2023-24 वित्तीय वर्ष में शिक्षा क्षेत्र के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9 प्रतिशत अधिक है। इस बजट में डिजिटल बुनियादी ढाँचा, शिक्षक प्रशिक्षण और विशेष शिक्षा कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी गई है। इन पहलों का उद्देश्य शहरी‑ग्रामीण अंतर को घटाना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है।
2024 में सरकार ने 12 लाख स्कूलों में डिजिटल कक्षा स्थापित करने का लक्ष्य रखा। इस योजना के तहत प्रत्येक कक्षा में हाई‑स्पीड इंटरनेट, इंटरैक्टिव बोर्ड और शैक्षिक सॉफ़्टवेयर उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रारंभिक चरण में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना में 3.5 लाख स्कूलों को उपकरण प्रदान किए जा चुके हैं। प्रौद्योगिकी साझेदार कंपनियों के साथ किए गए समझौते के अनुसार, वार्षिक रखरखाव लागत को राज्य की शिक्षा बजट में 0.3 प्रतिशत के रूप में शामिल किया गया है।
शिक्षक क्षमता वृद्धि के लिए केंद्र ने राष्ट्रीय शिक्षक प्रशिक्षण मिशन (NTTM) को 2024 में विस्तारित किया। इस मिशन के तहत 6.2 लाख शिक्षक ऑनलाइन और ऑफ़लाइन दोनों मोड में 120 घंटे के व्यावसायिक विकास कार्यक्रमों में भाग लेंगे। प्रशिक्षण में डिजिटल पेडागॉजी, समावेशी शिक्षा और मूल्यांकन तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रारंभिक रिपोर्ट दर्शाती है कि पहले दो महीनों में 78 प्रतिशत प्रशिक्षु ने अपने शिक्षण कौशल में सुधार की सूचना दी है।
इन सकारात्मक कदमों के बावजूद भारत में शिक्षा प्रणाली कई चुनौतियों का सामना कर रही है। 2024 के आंकड़ों के अनुसार, 6.5 करोड़ छात्र अभी भी स्कूल छोड़ रहे हैं, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रॉपआउट दर 12 प्रतिशत तक पहुंच गई है। लिंग अंतर को कम करने के प्रयासों के बावजूद लड़कियों की उपस्थिति दर 93.5 प्रतिशत बनी हुई है, जो पुरुषों की 96.2 प्रतिशत से नीचे है। साथ ही, विशेष आवश्यकता वाले छात्रों के लिए पर्याप्त समावेशी सुविधाओं की कमी एक प्रमुख समस्या बनी हुई है।
भविष्य की दिशा में नीति निर्माता डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास और समान पहुँच को मुख्य स्तंभ मान रहे हैं। 2025 तक सभी सरकारी स्कूलों में 100 प्रतिशत इंटरनेट कवरेज और 15 लाख शिक्षक को उन्नत प्रशिक्षण प्रदान करने की योजना है। इस रणनीति के तहत निजी एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाकर शैक्षिक सामग्री की गुणवत्ता को भी सुधारने का लक्ष्य रखा गया है। इन समग्र उपायों से भारत की शिक्षा प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में ठोस प्रगति की उम्मीद की जा रही है।