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सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान का समापन किया
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सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान का समापन किया

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•13 अक्टूबर 2026 को 03:52 am बजे•0 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें

देशव्यापी स्वच्छता और जागरूकता पहलों के अंतर्गत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एसएमई) मंत्रालय ने ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान का सफल समापन किया, जिसमें उद्योग‑संबंधी संस्थाओं और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी रही।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने पिछले दो वर्षों में चलाए गए ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान को औपचारिक रूप से समाप्त किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छोटे एवं मध्यम उद्योगों के कार्यस्थलों, उत्पादन इकाइयों और उनके आस‑पास के क्षेत्रों में स्वच्छता, स्वास्थ्य और पर्यावरणीय जागरूकता को सुदृढ़ करना था। मंत्रालय ने इस दौरान 12 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में 1,500 से अधिक कार्यशालाओं, सफाई अभियानों और जागरूकता सत्रों का आयोजन किया, जिसमें एसएमई मालिकों, कर्मचारियों और स्थानीय नागरिकों को सक्रिय रूप से शामिल किया गया। इन कार्यक्रमों में पुनर्चक्रण, जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन और स्वच्छ उत्पादन प्रक्रियाओं पर विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिससे उद्योगों की सतत विकास क्षमता में उल्लेखनीय सुधार की अपेक्षा की जा रही है।

स्वच्छता ही सेवा 2026 को राष्ट्रीय स्वच्छता मिशन के साथ समन्वयित किया गया, जिससे सरकारी नीतियों और निजी क्षेत्र की पहल में तालमेल स्थापित हो सका। मंत्रालय ने अभियान के परिणामस्वरूप 30 प्रतिशत कचरा पुनर्चक्रण दर में वृद्धि, जल उपयोग में 20 प्रतिशत कमी और कार्यस्थल पर स्वच्छता मानकों के अनुपालन में उल्लेखनीय सुधार की सूचना दी। इसके अतिरिक्त, इस अभियान ने सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति उद्योगों की प्रतिबद्धता को भी उजागर किया, जिससे स्थानीय समुदायों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता और सहभागिता में वृद्धि हुई।

आगे के चरणों में मंत्रालय ने इस मॉडल को दीर्घकालिक नीति में शामिल करने की योजना घोषित की है, जिससे स्वच्छता और पर्यावरणीय संरक्षण को राष्ट्रीय आर्थिक विकास के साथ जोड़कर सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें। इस प्रकार, ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ न केवल एक अभियान के रूप में समाप्त हुआ, बल्कि भारत के एसएमई क्षेत्र में स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति एक स्थायी प्रतिबद्धता के रूप में स्थापित हुआ।
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