राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2024: भारत की शिक्षा प्रणाली में प्रमुख बदलाव और भविष्य की चुनौतियां
Naitik Chakravarti Times
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2024 में लागू नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, बजट वृद्धि और डिजिटल पहल ने भारत की शैक्षिक संरचना में परिवर्तन लाए हैं, जबकि सतत सुधार की आवश्यकता बनी हुई है।
भारत में शिक्षा क्षेत्र ने पिछले दो दशकों में कई परिवर्तन देखे हैं, जिसमें 2024 में लागू हुआ राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) प्रमुख भूमिका निभा रहा है। इस नीति का लक्ष्य 2030 तक साक्षरता दर को 95 प्रतिशत तक पहुंचाना और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना है। सरकार ने 2024-2025 वित्तीय वर्ष में शिक्षा बजट को 2.5 ट्रिलियन रुपये आवंटित किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक है। इन उपायों के तहत प्राथमिक शिक्षा में मुफ्त पुस्तकें, डिजिटल कक्षाएं और शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम तेज़ी से लागू किए जा रहे हैं। इन पहलों का प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शैक्षिक अंतर को घटाना और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना है।
रिपोर्टिंग एजेंसी की नवीनतम आँकड़ों के अनुसार 2023 में भारत में स्कूल-प्रवेश दर 94.2 प्रतिशत तक पहुँच गई, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 92.5 प्रतिशत रही। उच्च माध्यमिक स्तर पर महिला छात्राओं की भागीदारी 48.7 प्रतिशत पर स्थिर रही, जो 2018 की 44.3 प्रतिशत से उल्लेखनीय सुधार दर्शाती है। नेशनल सैंप्लिंग फ्रेमवर्क (NSF) द्वारा संचालित सर्वेक्षण ने दिखाया कि 68 प्रतिशत राज्य ने प्राथमिक शिक्षा में अनिवार्य मध्यवर्ती कक्षा (कक्षा 6-8) लागू कर ली है। इस चरण में पाठ्यक्रम को विज्ञान, गणित और भाषा कौशल पर अधिक जोर देने के लिए पुनः डिज़ाइन किया गया।
शिक्षक क्षमता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 2024 में 1.2 मिलियन शिक्षकों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में प्रशिक्षण प्रदान करने का लक्ष्य रखा। इस योजना के तहत प्रत्येक शिक्षक को कम से कम 40 घंटे की पेशेवर विकास कार्यशाला में भाग लेना अनिवार्य है, जिसमें प्रौद्योगिकी-आधारित शिक्षण विधियों, मूल्यांकन तकनीकों और समावेशी कक्षा प्रबंधन पर ध्यान दिया जाता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रथम चरण 2024 के पहले तिमाही में 350,000 शिक्षकों को कवर कर चुका है, जबकि शेष 850,000 शिक्षकों को अगले दो वर्षों में पूरा किया जाएगा। प्रारंभिक मूल्यांकन ने दिखाया कि प्रशिक्षित शिक्षकों की छात्र सहभागिता में 12 प्रतिशत सुधार हुआ।
डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में 2024 में भारत ने 35 करोड़ छात्र-छात्राओं को इंटरनेट-आधारित शिक्षण प्लेटफ़ॉर्म से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया। इस दिशा में सरकार ने 1.8 ट्रिलियन रुपये की राशि के साथ राष्ट्रीय डिजिटल लर्निंग नेटवर्क (NDLN) की स्थापना की, जिससे हाईस्पीड कनेक्टिविटी वाले 12,000 स्कूलों को प्राथमिकता दी गई। NDLN के माध्यम से लाइव कक्षाएँ, इंटरैक्टिव क्विज़ और मल्टीमीडिया सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे शहरी और ग्रामीण छात्रों के बीच शैक्षिक अंतर घटाने की उम्मीद है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, प्लेटफ़ॉर्म के उपयोगकर्ता संख्या में 28 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है, जबकि छात्र प्रदर्शन में औसत 7 अंक का सुधार दर्ज किया गया।
इन सभी पहलों के बावजूद, भारत में शिक्षा प्रणाली को अभी भी बुनियादी बुनियादी ढांचे, शिक्षक-छात्र अनुपात और सामाजिक-आर्थिक असमानताओं जैसे मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सतत निवेश, नीति निरंतरता और स्थानीय स्तर पर सामुदायिक भागीदारी के बिना इन चुनौतियों को पूरी तरह से दूर करना कठिन रहेगा। भविष्य में यदि सरकार इन क्षेत्रों में लक्षित सुधार लागू करती है, तो 2030 तक भारत को विश्व स्तर पर शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाना संभव हो सकता है। इस प्रकार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सफल कार्यान्वयन से देश की समग्र सामाजिक-आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान की अपेक्षा की जा रही है।