भारत सरकार ने आज नई राष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) नीति की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें डिजिटल साक्षरता, डेटा सुरक्षा और नवाचार को बढ़ावा देने के प्रमुख उपायों की घोषणा की गई है।
भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर नई राष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता नीति (AI नीति) का खुलासा किया। इस नीति का उद्देश्य देश में AI तकनीकों के विकास को तेज़ करना, उद्योगों में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना और सामाजिक लाभ के लिए जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना है। विज्ञप्ति में कहा गया कि नीति के चार मुख्य स्तम्भ हैं: (1) शैक्षिक संस्थानों में AI‑आधारित पाठ्यक्रम का विस्तार, (2) डेटा सुरक्षा एवं गोपनीयता के लिए मजबूत नियामक ढांचा, (3) स्टार्ट‑अप एवं छोटे एवं मध्यम उद्यमों (SMEs) को वित्तीय एवं तकनीकी समर्थन, तथा (4) सार्वजनिक सेवाओं में AI का नैतिक और पारदर्शी उपयोग। इस दिशा में सरकार ने विभिन्न राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों और निजी क्षेत्र के साथ सहयोगात्मक मंच स्थापित करने की योजना भी घोषित की है, जिससे नीति के कार्यान्वयन में सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहन मिले।
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने डिजिटल इंडिया, स्टार्ट‑अप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से तकनीकी इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ किया है, परंतु AI के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अभी भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस नई नीति के तहत सरकार ने AI‑संबंधित शोध एवं विकास (R&D) के लिए विशेष निधि आवंटित करने की घोषणा की, जिससे विश्वविद्यालयों और निजी प्रयोगशालाओं को उन्नत प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, नीति में नैतिक AI उपयोग के लिए एक स्वतंत्र नियामक निकाय की स्थापना का प्रस्ताव भी शामिल है, जो डेटा दुरुपयोग और एल्गोरिदमिक पक्षपात को रोकने में मदद करेगा।
विज्ञप्ति में यह स्पष्ट किया गया कि नीति के प्रारम्भिक चरण में प्रमुख क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और