प्रधानमंत्री आवास योजना‑शहरी: आवास, समावेशन और सशक्तिकरण की कहानी
Naitik Chakravarti Times
••3 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें
प्रधानमंत्री आवास योजना‑शहरी ने शहरी गरीब वर्ग को किफायती घर, सामाजिक समावेशन और आर्थिक सशक्तिकरण के तीन स्तम्भों पर केंद्रित करके भारत के शहरी विकास में नया आयाम जोड़ा है।
प्रधानमंत्री आवास योजना‑शहरी (PMAY‑Urban) को 2015 में राष्ट्रीय शहरी गरीबी उन्मूलन के हिस्से के रूप में लॉन्च किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को सुरक्षित, किफायती और टिकाऊ आवास प्रदान करना है। योजना के तहत लाभार्थियों को सब्सिडी, ऋण सुविधा और तकनीकी सहायता दी जाती है, जिससे वे अपने घरों को स्वयं बनाकर या मौजूदा आवास में सुधार करके स्थायी रहने की स्थिति प्राप्त कर सकें। अब तक इस योजना के तहत लगभग दो करोड़ से अधिक घरों का निर्माण या सुधार पूरा हो चुका है, जिससे लाखों शहरी गरीब परिवारों को न केवल छत मिली है बल्कि सामाजिक सुरक्षा जाल में उनका समावेश भी मजबूत हुआ है।
आवास के साथ-साथ योजना ने समावेशन को भी प्राथमिकता दी है। विशेष रूप से महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग व्यक्तियों को लक्षित करने के लिए अलग-अलग सब्सिडी मानदंड और सुविधा प्रदान की गई है। कई शहरों में महिलाओं को स्वयं घर बनाने या सुधार करने के लिए तकनीकी प्रशिक्षण एवं उद्यमिता समर्थन दिया जा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, स्थानीय निकायों और बैंकिंग संस्थाओं के सहयोग से सस्ते ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराकर घर बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।
आगे की योजना में शहरी आवास की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए हरित निर्माण तकनीक, ऊर्जा दक्षता और स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर को शामिल करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार ने योजना के विस्तार के लिए अतिरिक्त बजट आवंटन की घोषणा की है, जिससे अगले चरण में और अधिक परिवारों को घर मिल सकेगा और शहरी गरीबी के मूल कारणों को दूर करने में मदद मिलेगी। इस प्रकार, प्रधानमंत्री आवास योजना‑शहरी न केवल आवास प्रदान करती है, बल्कि सामाजिक समावेशन और आर्थिक सशक्तिकरण के माध्यम से शहरी भारत के विकास को नई दिशा दे रही है।