भारत में प्रौद्योगिकी का विकास: 2024 की प्रमुख पहल और भविष्य की दिशा
Naitik Chakravarti Times
••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
भारत ने पिछले दो दशकों में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। 2024 में सरकारी और निजी निवेश ने डिजिटल परिवर्तन को तेज किया, जबकि चुनौतियों का समाधान आवश्यक है। इस लेख में प्रमुख पहल, निवेश, चुनौतियाँ और भविष्य की संभावनाओं का विश्लेषण किया गया है।
भारत ने पिछले दो दशकों में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिससे आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन और सामाजिक परिवर्तन में नई संभावनाएँ उत्पन्न हुई हैं। 2024 में, भारत की आईटी निर्यात आय 150 बिलियन डॉलर तक पहुँच गई, जबकि डिजिटल लेन‑देन की मात्रा 12 करोड़ करोड़ रुपये दर्ज की गई। सरकार ने डिजिटल भारत, स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों के तहत बुनियादी ढाँचे में 2.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया। इस लेख में हम 2024 की प्रमुख प्रौद्योगिकी पहलों, निजी क्षेत्र की भूमिका, चुनौतियों और भविष्य की दिशा का विश्लेषण करेंगे।
डिजिटल भारत पहल ने 2024 में 1.8 करोड़ नए broadband कनेक्शन जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच को 68% तक बढ़ाया। साथ ही, 2024 में लागू किए गए 5G परीक्षण ने 12 प्रमुख शहरों में 3.2 मिलियन उपयोगकर्ताओं को उच्च गति इंटरनेट प्रदान किया। इन पहलों ने ई‑गवर्नेंस सेवाओं को सुदृढ़ किया, जिससे सरकारी सेवाओं की पहुँच में 45% सुधार आया।
निजी क्षेत्र ने इस माहौल का लाभ उठाते हुए एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग और सैमसंग जैसे क्षेत्रों में निवेश को 2024 में 3.9 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया। भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम ने 2024 में 12,500 नई कंपनियों की स्थापना की, जिनमें 1,800 कंपनियों ने सीरियल फंडिंग प्राप्त की। यह निवेश विशेष रूप से हेल्थकेयर AI, फिनटेक और एजुकेशन टेक में केंद्रित रहा, जिससे रोजगार में 2.1 लाख नई नौकरियां पैदा हुईं।
इन सकारात्मक संकेतकों के बावजूद, डिजिटल विभाजन और साइबर सुरक्षा जोखिम अभी भी प्रमुख चुनौतियां बने हुए हैं। 2024 में भारत में साइबर हमलों की संख्या 1.3 मिलियन तक पहुंच गई, जिसमें वित्तीय संस्थानों को 42% अधिक लक्ष्य बनाया गया। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट गति औसत 2.4 Mbps रह गई, जो शहरी औसत 12.7 Mbps से काफी कम है, जिससे डिजिटल साक्षरता में असमानता बनी हुई है।
शिक्षा और कौशल विकास के लिए सरकार ने 2024 में 1.2 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया, जिससे 5 मिलियन छात्रों को कोडिंग और डेटा विज्ञान में प्रशिक्षित किया गया। निजी कंपनियों ने भी 2024 में 450 करोड़ रुपये का सहयोग कर 300 मिलियन ऑनलाइन प्रशिक्षण घंटे प्रदान किए। यह संयुक्त प्रयास डिजिटल अर्थव्यवस्था में मानव पूंजी को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया है।
भविष्य की दृष्टि में, विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2025‑2030 तक भारत की प्रौद्योगिकी उद्योग का वार्षिक वृद्धि दर 12% बनी रहेगी, और 2030 तक AI‑आधारित समाधान 30% सभी उद्योगों में एकीकृत हो जाएंगे। इस परिदृश्य में नीति समर्थन, बुनियादी ढाँचा विकास और निरंतर कौशल उन्नयन को प्राथमिकता देना आवश्यक होगा, ताकि भारत वैश्विक प्रौद्योगिकी मंच पर अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को सुदृढ़ कर सके।