मत्स्यपालन विभाग ने विशेष अभियान 6.0 के अंतर्गत स्वच्छता और सुशासन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की
Naitik Chakravarti Times
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मत्स्यपालन विभाग ने विशेष अभियान 6.0 शुरू कर जल निकायों की सफाई, कचरा प्रबंधन और पारदर्शी प्रशासन को सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखा, जिससे मत्स्य उत्पादन में वृद्धि और पर्यावरणीय संतुलन सुनिश्चित हो सके।
मत्स्यपालन विभाग ने हाल ही में विशेष अभियान 6.0 की घोषणा की, जिसमें जल निकायों की स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और सुशासन को प्राथमिकता दी गई है। यह पहल राष्ट्रीय स्वच्छ भारत मिशन और जल संरक्षण नीति के साथ समन्वय में चल रही है, जिसका उद्देश्य नदियों, तालाबों और जलाशयों में जमा होने वाले प्लास्टिक, रासायनिक अपशिष्ट और जैविक कचरे को हटाकर जल की गुणवत्ता सुधारना है। विभाग ने इस अभियान के तहत 150 से अधिक जल निकायों में नियमित सफाई कार्य, सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रम और डिजिटल निगरानी प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही, मत्स्यपालन के लाभार्थियों को स्वच्छता के महत्व के बारे में जागरूक करने हेतु प्रशिक्षण शिविर और सूचना अभियान चलाए जाएंगे।
साथ ही, सुशासन को सुदृढ़ करने के लिए विभाग ने पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने की घोषणा की। इसमें ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से मत्स्य लाइसेंस, सब्सिडी और निधि वितरण की रीयल‑टाइम ट्रैकिंग, तथा भ्रष्टाचार रोकथाम हेतु स्वतंत्र निरीक्षण टीम की स्थापना शामिल है। इन उपायों से मत्स्यपालन के लाभार्थियों को तेज़ और निष्पक्ष सेवा मिलने की उम्मीद है, जबकि प्रशासनिक खर्चों में भी कटौती होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छ जल निकाय न केवल मछली उत्पादन में वृद्धि करेंगे, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा को भी सुदृढ़ करेंगे।
अभियान 6.0 के प्रारंभिक चरण में, कई जिलों ने पहले ही सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं; जल निकायों में ऑक्सीजन स्तर में सुधार और मछली के स्टॉक में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विभाग ने कहा कि यह पहल अगले दो वर्षों में विस्तारित की जाएगी और अन्य राज्य विभागों के साथ सहयोग के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल बनायी जाएगी। इस प्रकार, मत्स्यपालन विभाग ने स्वच्छता और सुशासन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को ठोस कार्यों के माध्यम से सिद्ध किया है, जिससे सतत मत्स्य उत्पादन और पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़े हैं।