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मत्स्य विभाग गहरे समुद्र में मछली पकड़ने को बढ़ावा देने और एक्सेस पास एवं एलओए धारकों के साथ संवाद हेतु राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित करेगा
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मत्स्य विभाग गहरे समुद्र में मछली पकड़ने को बढ़ावा देने और एक्सेस पास एवं एलओए धारकों के साथ संवाद हेतु राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित करेगा

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•16 सितंबर 2026 को 08:48 am बजे•4 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें

मत्स्य विभाग ने गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की क्षमता को सुदृढ़ करने और एक्सेस पास तथा एलओए (Letter of Agreement) धारकों के साथ सहयोग को मजबूत करने के लिए एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया है, जिसमें विभिन्न राज्य और केंद्र स्तर के हितधारक भाग लेंगे।

भारत के मत्स्य विभाग ने गहरे समुद्र में मछली पकड़ने को प्रोत्साहित करने तथा एक्सेस पास और एलओए (Letter of Agreement) धारकों के साथ संवाद को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया है। इस मंच में केंद्र तथा राज्य सरकारों के मत्स्य विभाग, समुद्री विज्ञान संस्थान, मछुआरे संघ, निजी उद्यम और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों को आमंत्रित किया गया है। कार्यशाला का मुख्य फोकस गहरे समुद्र में सतत् मछली पकड़ने की तकनीकों, जैव विविधता संरक्षण, तथा मौजूदा नियामक ढांचे में सुधार लाने पर रहेगा। इसके अलावा, एक्सेस पास की प्रक्रिया को सरल बनाकर छोटे एवं मध्यम मछुआरों को भी इस क्षेत्र में प्रवेश दिलाने की रणनीति पर भी चर्चा होगी।

कार्यशाला में विशेषज्ञ पैनल द्वारा गहरे समुद्र में प्रचलित प्रमुख प्रजातियों की जैविक विशेषताओं, मौसमी प्रवृत्तियों और बाजार मांग के आधार पर लक्ष्य निर्धारित करने की दिशा में मार्गदर्शन दिया जाएगा। साथ ही, एलओए धारकों के साथ सहयोगात्मक मॉडल विकसित करने के लिए डेटा शेयरिंग, पर्यावरणीय मूल्यांकन और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन को लेकर कार्य योजना तैयार की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य न केवल मत्स्य उत्पादन को बढ़ाना है, बल्कि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा को भी प्राथमिकता देना है, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक लाभ और खाद्य सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हो सके।

कार्यशाला के निष्कर्षों को आधार बनाकर मत्स्य विभाग आगामी महीनों में नीति संशोधन, नई लाइसेंसिंग प्रक्रिया और तकनीकी सहायता कार्यक्रम लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। इस पहल से गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की क्षमता को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाएगा, जिससे भारत की समुद्री निर्यात क्षमता में वृद्धि और ग्रामीण मत्स्य समुदायों की आय में सुधार की संभावनाएँ उज्जवल होंगी।
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