राष्ट्रपति ने दिल्ली, जम्मू‑कश्मीर, लद्दाख, झारखंड और कर्नाटक उच्च न्यायालयों में 14 न्यायिक अधिकारियों को न्यायाधीश व अपर न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया
Naitik Chakravarti Times
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राष्ट्रपति ने पाँच प्रमुख उच्च न्यायालयों में कुल 14 न्यायिक अधिकारियों को न्यायाधीश और अपर न्यायाधीश के पद पर नियुक्त कर, न्यायिक शक्ति को सुदृढ़ करने और लंबित मामलों की कमी को तेज करने का कदम उठाया।
राष्ट्रपति ने आज दिल्ली, जम्मू‑कश्मीर, लद्दाख, झारखंड और कर्नाटक उच्च न्यायालयों में 14 न्यायिक अधिकारियों को न्यायाधीश तथा अपर न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया। यह नियुक्ति भारत के संविधान के अनुच्छेद 217 और 224 के तहत की गई है, जिसमें राष्ट्रपति को उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायिक सहयोगी समिति (कोलेजियम) की सिफ़ारिशों को मानना अनिवार्य है। नियुक्तियों में वरिष्ठ वकीलों, अधीनस्थ न्यायालयों के अनुभवी न्यायाधीशों और विधायी सेवा में कार्यरत विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, जिससे न्यायिक विविधता और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को बढ़ावा मिलता है।
इन नियुक्तियों का प्रमुख उद्देश्य उच्च न्यायालयों में मौजूदा रिक्तियों को भरना और बढ़ते मामलों के बैकलॉग को कम करना है। पिछले कुछ वर्षों में न्यायिक कार्यभार में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जिसके कारण कई उच्च न्यायालयों में केस निपटान में देरी हुई। नई नियुक्तियों से न केवल न्यायिक प्रक्रिया की गति में सुधार की उम्मीद है, बल्कि न्यायपालिका की विश्वसनीयता और जनता के भरोसे को भी सुदृढ़ किया जाएगा। साथ ही, यह कदम न्यायिक सुधारों की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता, योग्यता‑आधारित चयन और सामाजिक समावेशिता को प्रमुखता दी जा रही है।
राष्ट्रपति ने कहा कि इन न्यायाधीशों और अपर न्यायाधीशों की नियुक्ति न्यायपालिका के कार्यभार को संतुलित करने, न्याय की शीघ्रता और सटीकता सुनिश्चित करने के साथ-साथ संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देगी। यह नियुक्ति न्यायिक प्रणाली को सुदृढ़ करने के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य के साथ संरेखित है, जिससे भारतीय न्याय व्यवस्था में सार्वजनिक विश्वास को पुनः स्थापित करने में मदद मिलेगी।